देवघर बना शिवलोक 108 KM की आस्था यात्रा और ड्रोन से सजी आकाशगाथा
देवघर में बरसा सावन, गूंजे ‘बोल बम’… आसमान में बिखरी शिवभक्ति की रौशनी
देवघर:-सावन का पहला दिन… और बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी एक बार फिर भक्तिरस में डूब चुकी है। आज से देवघर में विश्वविख्यात राजकीय श्रावणी मेला 2025 का शुभारंभ हुआ। हल्की बारिश के बीच जब श्रद्धालु ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे लगाते हुए मंदिर की ओर बढ़े, तो मानो धरती और आकाश दोनों शिवभक्ति में झूम उठे।

देवघर का श्रावणी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और विश्वास का प्रतीक है।
हर वर्ष सावन महीने में देशभर से लाखों कांवड़िए बिहार के सुल्तानगंज स्थित बाबा अजगैबीनाथ धाम से पवित्र गंगाजल लेकर 108 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करते हैं और देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।
आज दुम्मा में आयोजित शुभारंभ समारोह में झारखंड सरकार के कई मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। दीप प्रज्ज्वलन और फीता काटकर इस आध्यात्मिक उत्सव का विधिवत उद्घाटन किया गया।

इस वर्ष मेला कुछ खास है, क्योंकि झारखंड सरकार पहली बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक भव्य ड्रोन शो का भी आयोजन करने जा रही है। यह शो देवघर की पावन धरती पर आस्था के साथ-साथ तकनीक का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा। बाबा बैद्यनाथ की गाथा, कांवड़ियों की यात्रा और झारखंड की संस्कृति को आसमान में सजीव चित्रों के रूप में दर्शाया जाएगा।
देवघर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, सावन महीने में पूर्ण रूप से शिवमय हो जाता है।
हर सड़क, हर गली, हर नुक्कड़ पर सिर्फ शिव का नाम गूंजता है—
“जय बाबा बैद्यनाथ”, “बोल बम”, “शंभू शंकर त्रिपुरारी”।

यह मेला न केवल झारखंड की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि भारतवर्ष के श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा भी है, जो हर वर्ष सावन में उन्हें अपने आराध्य से जोड़ती है।
बारिश में भीगते श्रद्धालु जब कहते हैं “हर हर महादेव”,
तो लगता है जैसे देवघर की फिजाओं में भी शिव समा गए हों।
