
केदार दत्त, देहरादून।
मानव–वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती के बीच गुलदारों के हमलों में लगातार हो रही वृद्धि ने चिंता और गहरा दी है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने अब भारतीय वन्यजीव संस्थान (IWI) से गुलदारों की नई गणना कराने का निर्णय लिया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बीते वर्षों में गुलदारों की संख्या बढ़ी है या घटी है। गौरतलब है कि राज्य में पिछली गणना वर्ष 2022 में की गई थी, जिसमें गुलदारों की संख्या 3115 आंकी गई थी। चार वर्षों के अंतराल के बाद होने वाली इस नई गणना को खास बनाया गया है। इस बार केवल संख्या ही नहीं, बल्कि गुलदारों के व्यवहार में आए बदलाव, आबादी वाले इलाकों में उनकी बढ़ती मौजूदगी और हमलों के कारणों का भी गहन विश्लेषण किया जाएगा। राज्य में जब भी वन्यजीव हमलों की चर्चा होती है, तो सबसे पहले गुलदार का नाम सामने आता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से यह धारणा बनती रही है कि गुलदारों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। हालांकि वर्ष 2008 के बाद लंबे समय तक कोई आधिकारिक गणना नहीं होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी। लंबे इंतजार के बाद वर्ष 2022 में कराई गई गणना में 1000 से 3500 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 2276 गुलदार पाए गए थे। वहीं वर्ष 2018 की बाघ गणना के दौरान 791 से 1000 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 839 गुलदारों का आकलन किया गया था। इन दोनों आंकड़ों को जोड़कर कुल संख्या 3115 मानी गई, जिसे 4 अगस्त 2023 को राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में सार्वजनिक किया गया था। अब नई गणना से न केवल गुलदारों की वास्तविक संख्या सामने आएगी, बल्कि मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने की रणनीति बनाने में भी अहम मदद मिलने की उम्मीद है।
