दावोस में झारखंड का महिला-केंद्रित विकास मॉडल बना चर्चा का विषय, कल्पना मुर्मू सोरेन ने रखा राज्य का विजन

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दावोस/रांची – विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में झारखंड की सशक्त मौजूदगी देखने को मिली, जहां झारखंड विधानसभा की सदस्य और महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के महिला-केंद्रित विकास विजन को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा। ब्रिक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BRICS CCI) के महिला अधिकारिता वर्टिकल के सहयोग से आयोजित पैनल चर्चा में उन्होंने “महिला उद्यमिता: विकास को गति देना और सतत अर्थव्यवस्था का निर्माण” विषय पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड का विकास मॉडल केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है।
कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके आदिवासी और स्वदेशी मूल्यों से है, जहां जल, जंगल और जमीन को सिर्फ संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार माना जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य की महिलाएं सदियों से परिवार और समाज की रीढ़ रही हैं, लेकिन उनके श्रम को अक्सर “अदृश्य” मान लिया जाता है। अब समय आ गया है कि इस योगदान को आर्थिक और सामाजिक रूप से मान्यता मिले।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की नीतियां केवल योजनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित हैं। खासकर गृहिणियों और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।


महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि कैसे ये समूह स्थानीय उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे उद्यमों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विजन का जिक्र करते हुए कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि झारखंड का शासन मॉडल संसाधनों से ज्यादा इंसानों को प्राथमिकता देता है। सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब महिलाएं सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से सशक्त होंगी, तभी झारखंड और देश का सतत विकास संभव होगा। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वैश्विक निवेशकों और संस्थाओं को झारखंड आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि राज्य का महिला-नेतृत्व वाला विकास मॉडल दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

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