कड़ी बहस और देर रात तक चले हंगामे के बाद लोकसभा में ‘जय रामजी बिल’ पारित, मनरेगा का नाम बदला गया

New Delhi

लोकसभा में सोमवार देर रात तक चली तीखी बहस और सत्ता-विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव के बाद आखिरकार सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने से संबंधित ‘जय रामजी बिल’ को पारित करा लिया। बिल के पारित होते ही सदन में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया, वहीं विपक्ष ने इसे इतिहास और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।

सरकार की ओर से पेश किए गए इस विधेयक के तहत मनरेगा योजना का नाम बदलकर ‘जय रामजी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह नाम भारतीय संस्कृति, मूल्यों और ग्रामीण भारत की आत्मा को सम्मान देने के उद्देश्य से रखा गया है।


लोकसभा में देर रात तक चला हंगामा

बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर महात्मा गांधी के नाम को योजनाओं से हटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस, वाम दलों और अन्य विपक्षी सदस्यों ने इसे “इतिहास मिटाने की राजनीति” करार दिया।

विपक्षी सांसदों ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए जीवन रेखा है और इसका नाम बदलना जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। कई सांसदों ने सदन में नारेबाजी की, जिसके कारण कुछ समय के लिए कार्यवाही भी बाधित हुई।



सरकार का पक्ष: विकास से जुड़ा फैसला

सरकार की ओर से जवाब देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि योजना के मूल स्वरूप, अधिकार और बजट में कोई कटौती नहीं की जा रही है। केवल नाम परिवर्तन किया गया है, ताकि यह योजना भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से और अधिक जुड़ सके।

मंत्री ने कहा कि “यह बिल किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। यह ग्रामीण भारत के आत्मसम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।”


मत विभाजन के बाद पारित हुआ बिल

लगातार हंगामे और लंबी बहस के बाद देर रात मत विभाजन कराया गया, जिसमें सत्ता पक्ष के बहुमत के दम पर ‘जय रामजी बिल’ लोकसभा से पारित हो गया। बिल के पारित होते ही विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया।


देशभर में सियासी हलचल तेज

बिल के पास होते ही देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया है, वहीं सत्ताधारी दल के नेताओं ने इसे ऐतिहासिक फैसला करार दिया है। अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसके भविष्य को लेकर सियासी समीकरण अहम होंगे।

क्या बदलेगा नाम, या बदलेगी राजनीति?

मनरेगा का नाम बदलकर ‘जय रामजी योजना’ किए जाने के फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास योजनाएं राजनीति का मंच बनती जा रही हैं। आने वाले दिनों में इस बिल को लेकर सड़कों से लेकर संसद तक बहस और तेज होने की संभावना है।

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