स्कूलासियम बुक्स ने 48 किंडरगार्टन पुस्तकों का किया निर्माण

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बच्चों में वैज्ञानिक सोच और अनुभवात्मक शिक्षा को प्रोत्साहित करने की पहल

स्कूलासियम बुक्स ने सात वर्षों की कड़ी मेहनत और गहन शोध के बाद 48 किंडरगार्टन पुस्तकों का निर्माण किया है। ये पुस्तकें छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच और अनुभवात्मक शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।

स्कूलासियम के निदेशक साजिद हुसैन ने बताया कि यह परियोजना 2017 में झारखंड के चितरपुर स्थित माउंट एवरेस्ट पब्लिक स्कूल के रिसर्च सेंटर से शुरू हुई। इन पुस्तकों को मेकर-सेंटर्ड लर्निंग और अनुभव आधारित शिक्षा के सिद्धांतों पर आधारित होकर लिखा गया है। इस कार्य में देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों का योगदान रहा है, जिनमें अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की स्वाति सरकार, शिक्षा मित्रा की संस्थापक सुदेशना सिन्हा, डीपीएस रांची के वरिष्ठ कला शिक्षक डॉ. विनोद रंजन और झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के कुलपति प्रो. डॉ. डी.के. सिंह जैसी हस्तियों की प्रमुख भूमिका रही।

इन पुस्तकों के महत्व को समझाते हुए, रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर ए.ए. खान ने कहा, “स्कूलासियम की इन पुस्तकों ने बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा में नयापन और गहराई जोड़ने का कार्य किया है। यह पुस्तकें न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करती हैं, बल्कि बच्चों को आनंददायक और सक्रिय शिक्षा प्रदान करने में भी सहायक हैं। ऐसी गुणवत्तापूर्ण सामग्री बच्चों के समग्र विकास के लिए अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगी।”

साजिद हुसैन ने आगे बताया कि झारखंड के कई प्रतिष्ठित स्कूल, जैसे जमशेदपुर का डीबीएमएस कदमा, इन पुस्तकों को 2025-26 सत्र के लिए लागू कर रहे हैं। अन्य कई स्कूलों से भी बातचीत चल रही है।

यह पुस्तकें 2017 से व्यापक शोध के बाद तैयार की गई हैं। इन्हें नई शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 के अनुरूप विकसित किया गया है। साथ ही, वैश्विक मानकों जैसे ओईसीडी 2030 फ्रेमवर्क का भी पालन किया गया है।

साजिद हुसैन ने बताया कि इन पुस्तकों का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा को सक्रिय, आनंददायक और जीवनभर प्रभावी बनाना है। साथ ही, ये शिक्षकों और अभिभावकों को भी सशक्त बनाती हैं। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने स्कूलासियम टीम, सलाहकारों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया।

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