जेएनयू हिंसा 2020 की बरसी पर नारेबाजी से बढ़ा विवाद, लेफ्ट और एबीवीपी आमने-सामने, FIR की मांग से मामला राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा


जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में वर्ष 2020 की कैंपस हिंसा की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी को लेकर विवाद गहराता चला गया है। लेफ्ट समर्थित छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिसके चलते यह मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन गया है। घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर माहौल बिगाड़ने और उकसावे का आरोप लगाया है। लेफ्ट संगठनों का कहना है कि बरसी के मौके पर शांति से कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था, लेकिन विरोध के चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। वहीं, एबीवीपी ने आरोप लगाया है कि नारेबाजी के जरिए जानबूझकर भड़काऊ माहौल बनाया गया, जिससे कैंपस में अशांति फैलने का खतरा पैदा हुआ।
विवाद के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। छात्र संगठनों के साथ-साथ कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर बनाए रखने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कैंपस में किसी भी तरह की हिंसा या अशांति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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