मोती पालन क्लस्टर में मूल्य संवर्धन पर कार्यशाला

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हजारीबाग। भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग एवं झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (मत्स्य प्रभाग) के संयुक्त प्रयास से राष्ट्रीय मत्स्य पालन पोस्ट हार्वेस्ट प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण संस्थान (NIFPHATT) एवं राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के सहयोग से हजारीबाग में मोती पालन क्लस्टर में मूल्य संवर्धन पर कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय मत्स्य किसानों एवं उद्यमियों को मोती पालन में मूल्य संवर्धन के नए तरीकों से अवगत कराना और बाजार में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना था।

कार्यशाला का आयोजन एवं प्रमुख उपस्थिति

यह कार्यशाला सूचना भवन, पुराने डीसी कार्यालय, जिला बोर्ड चौक, हजारीबाग में आयोजित की गई। उपायुक्त नैंसी सहाय के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में मोती पालन के आर्थिक एवं व्यावसायिक संभावनाओं पर विशेष चर्चा हुई। जिले में मोती पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, किसानों को इस क्षेत्र में हर संभव सहायता प्रदान करने की बात रखी गई। डॉ. एच.एन. द्विवेदी, निदेशक, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (मत्स्य प्रभाग), झारखंड सरकार ने अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मोती पालन से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और यह झारखंड की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं के तहत मोती पालन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जाएगी।
कार्यशाला में लगभग 100 मत्स्य किसान, उद्यमी, बैंक प्रतिनिधि एवं संबंधित हितधारकों ने भाग लिया और विभिन्न विषयों पर गहन चर्चाएँ कीं।

LDM ने मत्स्य पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) एवं अन्य वित्तीय योजनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेक्टर मत्स्य किसानों को वित्तीय सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे वे अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना सकें।

प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञों की प्रस्तुति

डॉ. शैलेश सौरभ, प्रधान वैज्ञानिक, CIFA, भुवनेश्वर ने मोती प्रजनन तकनीक एवं इसकी व्यावसायिक संभावनाओं पर जानकारी दी।
गौरव कुमार, उप महाप्रबंधक, NABARD ने मोती पालन के लिए उपलब्ध वित्तीय योजनाओं और ऋण सुविधाओं पर चर्चा की।
डॉ. मनमोहन कुमार, सहायक प्रोफेसर, मत्स्य महाविद्यालय, गुमला ने मीठे पानी में मोती पालन की आधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डाला।
डॉ. जे.एस. मीना, उप निदेशक, NIFPHATT, विशाखापत्तनम ने मूल्य संवर्धन एवं बाज़ार विस्तार में NIFPHATT की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यशाला में मोती पालन क्लस्टर से जुड़े किसानों और उद्यमियों ने अपने अनुभव और सफलता की कहानियाँ साझा कीं, जिससे अन्य किसानों को प्रेरणा मिली।

मुख्य उपलब्धियां

मोती पालन में आधुनिक तकनीकों और मूल्य संवर्धन को अपनाने की जानकारी प्रदान की गई।
बाज़ार विस्तार और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोती की ब्रांडिंग पर चर्चा हुई।
नए उद्यमियों और किसानों के लिए सरकारी योजनाओं एवं वित्तीय सहायता की जानकारी दी गई।
उपायुक्त नैंसी सहाय के नेतृत्व में जिला प्रशासन, मत्स्य विभाग एवं अन्य सहयोगी संस्थाएँ मोती पालन उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेंगी।
यह कार्यशाला झारखंड सरकार, भारत सरकार, अनुसंधान संगठनों, वित्तीय संस्थानों एवं निजी क्षेत्र के बीच समन्वय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और राज्य में मत्स्य पालन व मोती पालन के सतत विकास में सहायक सिद्ध होगी।

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