एयर एंबुलेंस हादसा: तीन परिवारों का बुझ गया घर का इकलौता चिराग, लातेहार चतरा और बिहार के सिवान में पसरा मातम

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एयर एंबुलेंस हादसा: तीन परिवारों का बुझ गया घर का इकलौता चिराग, लातेहार चतरा और बिहार के सिवान में पसरा मातमचतरा : जीवन बचाने के मिशन पर निकली एयर एंबुलेंस हादसे में सात लोगों की असामयिक मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। लेकिन इस हादसे का सबसे गहरा घाव दो ऐसे परिवारों को मिला, जिनके घर का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। सबसे ज्यादा सदमा डॉ. विकास कुमार गुप्ता के परिवार को लगा। उनके पिता बजरंगी प्रसाद ने कांपती आवाज में बताया कि उन्होंने सब्जी बेच-बेचकर बेटे को पढ़ाया था। गरीबी और अभाव के बीच पला सपना तब साकार हुआ, जब बेटा डॉक्टर बना। उन्हें उम्मीद थी कि वही बेटा बुढ़ापे का सहारा बनेगा, संघर्षों का प्रतिफल देगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे के कंधे पर सिर रखकर सुकून पाने की चाह थी, उसी बेटे की अर्थी को पिता को अपने कंधों पर उठाना पड़ा। यह दृश्य देख हर आंख नम हो गई। वहीं चतरा के कार्यपालक अभियंता देवसहाय भगत के इकलौते पुत्र, पायलट विवेक विकास भगत भी इस हादसे में काल के गाल में समा गए। पिता ने कहा, “मेरे बेटे में मुझे रब दिखता था। उसमें समाज सेवा का जज्बा था।” परिवार की सारी उम्मीदें और सपने उसी एक बेटे से जुड़े थे। बेटे की मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। मां बेसुध हो गईं। वहीं एयर एम्बुलेंस दुर्घटना में जान गंवाने वाले स्वास्थ्य कर्मी सचिन कुमार मिश्रा भी अपनी माँ का इकलौता बेटा होने के साथ साथ बुढ़ापे का सहारा था। उसके पिता की मौत तब हो गई थी जब वह छोटा था। उसकी माँ गांव में एक स्कूल में मध्याह्न भोजन बनाकर अपने बेटे को पढ़ाई थी। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।हादसे के बाद मंत्री इरफान अंसारी, सांसद काली चरण सिंह और विधायक जनार्दन पासवान ने परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया। जिला प्रशासन की ओर से डीसी और एसपी ने भी शोक संतप्त परिवारों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।यह हादसा सिर्फ सात जिंदगियों का अंत नहीं है, बल्कि सात परिवारों के सपनों, उम्मीदों और भविष्य का टूट जाना है। जिन बेटों को पिता ने बुढ़ापे का सहारा समझकर पाला-पोसा, आज उन्हीं की अर्थी को कंधा देना पड़ा—इससे बड़ा दुख शायद किसी पिता के जीवन में नहीं हो सकता।आज लातेहार और चतरा में मातम पसरा है। हर आंख नम है, हर दिल में टीस है। यह घटना एक बार फिर याद दिला गई कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। जीवन बचाने निकली एयर एंबुलेंस ने सात परिवारों को ऐसा जख्म दे दिया, जो शायद कभी भर नहीं पाएगा।

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