काठमांडू/नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच सदियों से चले आ रहे ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते पर नई सरकारी नीतियों की छाया पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में नेपाल की नई सरकार द्वारा सीमा पर कड़े कस्टम नियम लागू करने के फैसले के बाद आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दलों में भी असंतोष बढ़ने लगा है।जानकारी के अनुसार, जेन-जी आंदोलन से उभरे काठमांडू के मेयर बालेन शाह और रवि लामीछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सत्ता में आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव किए गए हैं। इन्हीं बदलावों के तहत भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने वाले लोगों और सामान पर कस्टम नियम सख्ती से लागू किए जा रहे हैं।नई व्यवस्था के तहत अब भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों को अपने साथ ले जाए जा रहे सामान की जानकारी देनी होगी और तय सीमा से अधिक सामान पर शुल्क भी देना पड़ सकता है। इससे सीमा पार रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। खासकर उन परिवारों को परेशानी हो रही है, जिनके रिश्तेदार दोनों देशों में बसे हुए हैं और जिनका आना-जाना आम बात है।राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। खुद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के कुछ नेताओं ने इस नीति पर सवाल उठाए हैं और इसे आम जनता के हितों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा और पारंपरिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए ऐसे फैसलों पर पुनर्विचार होना चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में सीमा पर कड़े नियम लागू करने से दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संबंधों पर असर पड़ सकता है।फिलहाल, नेपाल सरकार अपने फैसले पर कायम नजर आ रही है, लेकिन बढ़ते विरोध के बीच आने वाले समय में इस नीति में बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
नई नीति से ‘रोटी-बेटी’ संबंधों पर असर, नेपाल सरकार के फैसले का बढ़ता विरोध
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Amarnath Pathak
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