
उत्तर प्रदेश में साल 2016 में एनएच-91 पर हुई महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बंदूक की नोक पर सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब इस सनसनीखेज मामले में सज़ा सुनाए जाने से पहले पीड़ित परिवार की एक मार्मिक लेकिन प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। इस घटना में पीड़िता की बेटी उस समय महज़ 14 वर्ष की स्कूली छात्रा थी। आज वही लड़की 23 वर्ष की हो चुकी है और कानून की पढ़ाई कर रही है। उसका सपना है कि वह एक दिन न्यायाधीश बनकर समाज में न्याय की स्थापना करे, ताकि किसी और को उसके जैसी पीड़ा से न गुजरना पड़े।

बताया जा रहा है कि इस दर्दनाक घटना के बावजूद युवती ने हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। कठिन हालात, सामाजिक दबाव और मानसिक आघात के बावजूद उसने आगे बढ़ने का रास्ता चुना। अब जब इस मामले में दोषियों को सज़ा सुनाए जाने की प्रक्रिया पूरी होने वाली है, तब पीड़िता की यह संघर्षपूर्ण यात्रा कई लोगों के लिए उम्मीद और साहस की मिसाल बन रही है। यह मामला न केवल न्याय व्यवस्था की परीक्षा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पीड़िताएं अगर साहस और संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो वे अपने दर्द को शक्ति में बदल सकती हैं।
