
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही एक आम सवाल हर घर, हर गली और हर दफ्तर में सुनने को मिलता है—क्या सर्दियों में रोज़ नहाना चाहिए या नहीं? कुछ लोग इसे सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं, तो कुछ के लिए यह रोज़मर्रा की ज़रूरत और स्वच्छता का अहम हिस्सा है। इस मुद्दे पर समाज में परंपरागत मान्यताओं से लेकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तक, कई तरह की राय सामने आती हैं।
परंपरागत सोच क्या कहती है?
भारतीय समाज में लंबे समय से यह धारणा रही है कि सर्दियों में ज्यादा नहाने से सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार होने का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्ग अक्सर सलाह देते हैं कि ठंड के मौसम में नहाने की आवृत्ति कम करनी चाहिए, खासकर ठंडे पानी से। ग्रामीण क्षेत्रों और ठंडे इलाकों में आज भी यह मान्यता गहराई से जमी हुई है।
चिकित्सा विज्ञान की राय
डॉक्टरों और त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में रोज़ नहाना गलत नहीं है, लेकिन इसके तरीके में सावधानी ज़रूरी है। ठंड के मौसम में त्वचा पहले से ही रूखी हो जाती है। ऐसे में बहुत ज्यादा गर्म पानी से नहाना या लंबे समय तक नहाना त्वचा की प्राकृतिक नमी को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे खुजली, ड्राई स्किन और एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
गुनगुने पानी से नहाना सबसे बेहतर होता है.
ज्यादा देर तक न नहाएं.
तेज़ केमिकल वाले साबुन से बचें.
नहाने के बाद मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल ज़रूरी है.
रोज़ नहाने के फायदे
सही तरीके से नहाने पर सर्दियों में भी कई फायदे मिलते हैं:
शरीर की स्वच्छता बनी रहती है
रक्त संचार बेहतर होता है
थकान और तनाव कम होता है
ताजगी और मानसिक स्फूर्ति मिलती है
संक्रमण का खतरा घटता है
किन लोगों को विशेष सावधानी चाहिए?
बुजुर्ग, छोटे बच्चे, दमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इन वर्गों के लिए बहुत ठंडे या बहुत गर्म पानी से नहाना नुकसानदेह हो सकता है। डॉक्टर की सलाह से ही नियमित दिनचर्या तय करनी चाहिए।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सर्दियों में रोज़ नहाना न तो पूरी तरह सही है और न ही पूरी तरह गलत। यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, मौसम की तीव्रता और नहाने के तरीके पर निर्भर करता है। अगर सही सावधानियां बरती जाएं, तो सर्दियों में रोज़ नहाना भी सेहत के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।
