
खरगोन (मध्य प्रदेश)।
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में जननायक टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां कागजों में जहां धातु या संगमरमर की प्रतिमा दिखाकर करीब 10 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया, वहीं मौके पर मात्र 50 हजार रुपये की फाइबर मूर्ति तिराहे पर स्थापित कर दी गई। हैरानी की बात यह रही कि इस प्रतिमा का लोकार्पण विधायक और जिला कलेक्टर द्वारा भी कर दिया गया। मामला उजागर होने के बाद साफ हो गया कि प्रतिमा स्थापना में गंभीर लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार हुआ है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने जब मूर्ति की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, तब जांच शुरू की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि टेंडर शर्तों के विपरीत सस्ती फाइबर की प्रतिमा लगाई गई है, जबकि भुगतान महंगी प्रतिमा के अनुरूप दिखाया गया। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रतिमा बदलने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदार की भूमिका की जांच के आदेश भी दिए गए हैं। नगरपालिका ने कार्रवाई करते हुए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और अब दोबारा टेंडर जारी कर धातु की प्रतिमा स्थापित करने का फैसला लिया गया है। वहीं, विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को जननायक टंट्या मामा का अपमान बताते हुए जोरदार विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की है कि केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि इस लापरवाही में शामिल इंजीनियरों और अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए। यह मामला एक बार फिर सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी दिखाता है कि जनमहापुरुषों से जुड़े कार्यों में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।
