नई दिल्ली।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए समता नियमों को लेकर देशभर में मचे घमासान के बीच अब मशहूर कवि और वक्ता डॉ. कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया भी सामने आ गई है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के जरिए जाहिर की है। कुमार विश्वास ने दिवंगत कवि रमेश रंजन की एक कविता साझा करते हुए यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ भावनात्मक अंदाज में विरोध दर्ज कराया।
कुमार विश्वास ने एक्स पर लिखा—
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…।”
इस कविता के जरिए उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष किया है और यह जताने की कोशिश की है कि नए नियमों से समाज का एक वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और लोग अपने-अपने पक्ष में प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। दरअसल, यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए समता नियमों को लेकर सवर्ण समाज में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं किए गए हैं, जिससे असंतुलन पैदा हो सकता है। इसी को लेकर कई संगठनों और बुद्धिजीवियों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब बरेली के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी और मामला राजनीतिक रंग लेने लगा। इसके बाद सरकार भी हरकत में आई और इस पूरे मसले पर बीच का रास्ता निकालने को लेकर मंथन शुरू कर दिया गया।

कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया को भी इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि किसी भी नीति को बनाते समय समाज के सभी वर्गों की भावनाओं और अधिकारों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने जिस तरह कविता के माध्यम से अपनी बात रखी है, वह सीधे तौर पर मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। फिलहाल यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में बहस जारी है। एक ओर सरकार इसे समानता की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, तो दूसरी ओर कई लोग इसे एकतरफा फैसला मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विवाद को किस तरह सुलझाती है और क्या इन नियमों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
