
बांग्लादेश इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। राजधानी ढाका समेत देश के कई हिस्सों में बीते एक सप्ताह से हिंसा और उग्र विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हालात उस समय और बिगड़ गए जब बांग्लादेश के छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों ने सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए। इन प्रदर्शनों के दौरान भारत को भी निशाना बनाया जा रहा है। कई जगहों पर भारत विरोधी नारेबाजी और उकसावे वाली गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं, जिससे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहरा गया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हालात संवेदनशील बने हुए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बांग्लादेश में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत ने एहतियाती कदम उठाते हुए चटगांव स्थित इंडियन वीजा एप्लीकेशन सेंटर में वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी थीं। भारत का यह फैसला वहां कार्यरत कर्मचारियों और आवेदकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। भारत के इस कदम के बाद बांग्लादेश ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कांसुलर और वीजा सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला किया है। इससे दोनों देशों के नागरिकों को यात्रा और कूटनीतिक प्रक्रियाओं में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब रूस की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रूस ने भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कहा है कि बांग्लादेश को जितनी जल्दी हो सके हालात को सामान्य करने और रिश्तों को सुधारने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। रूस का कहना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद और संयम बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बांग्लादेश में हिंसा का दौर लंबा चला तो इसका असर न सिर्फ आंतरिक सुरक्षा पर पड़ेगा, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंधों पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बांग्लादेश की स्थिति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर टिकी हुई है।
