
नई दिल्ली।
देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक और सख्त रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। साइबर अपराधियों पर अंतिम प्रहार की तैयारी के तहत विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच समन्वय से एक उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समिति का गठन किया गया है।
गृह मंत्रालय ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट में अहम जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत के 1 और 16 दिसंबर 2025 के निर्देशों का पालन करते हुए यह समिति गठित की गई है। समिति का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के पीछे मौजूद कानूनी, तकनीकी, बैंकिंग और दूरसंचार प्रणालियों की कमजोरियों की पहचान करना और उन्हें दूर करने के ठोस उपाय सुझाना है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में देशभर में डिजिटल अरेस्ट के 1.23 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें ठगों ने करीब 1935 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इन मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन कॉल के जरिए डराते-धमकाते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं। यदि कोई व्यक्ति फोन पर डराकर या धमकाकर पैसे मांगता है, तो तुरंत कॉल काट दें और बिना देर किए 112 या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर इसकी सूचना दें। सरकार की इस मुहिम में गूगल, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी शामिल हैं। 6 जनवरी को इन कंपनियों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने, फर्जी अकाउंट्स और स्कैम नेटवर्क पर लगाम लगाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि यह समिति जल्द ही ठोस और व्यावहारिक सिफारिशें देगी, जिससे डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। यह पहल साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आम नागरिकों को ठगों से बचाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है।
