
मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी और टैबलेट आज जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। काम, पढ़ाई, मनोरंजन और सोशल मीडिया—हर जरूरत के लिए लोग लगातार स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं। लेकिन अगर आपका स्क्रीन टाइम दिन में 10 से 12 घंटे या उससे अधिक हो गया है, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से सबसे पहले आंखों पर असर पड़ता है। आंखों में जलन, सूखापन, धुंधलापन, सिरदर्द और नजर कमजोर होने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इस स्थिति को डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है, जो आज युवाओं और बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है। लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहने से शरीर की शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जो भविष्य में हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी अधिक स्क्रीन टाइम का गहरा असर पड़ता है। लगातार मोबाइल और सोशल मीडिया से जुड़े रहने वाले लोगों में तनाव, चिड़चिड़ापन, चिंता और डिप्रेशन की समस्या बढ़ रही है। नीली रोशनी (ब्लू लाइट) के कारण नींद का चक्र बिगड़ जाता है, जिससे अनिद्रा की शिकायत आम हो जाती है। नींद पूरी न होने से स्मरण शक्ति कमजोर होती है और काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि बच्चों और किशोरों में ज्यादा स्क्रीन टाइम से व्यवहार में चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और पढ़ाई में गिरावट देखी जा रही है। वहीं वयस्कों में गर्दन, कंधे और कमर दर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं, जिसे टेक्स्ट नेक और स्क्रीन पोस्चर सिंड्रोम कहा जाता है।

डॉक्टरों की सलाह है कि स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाए और हर 30 से 40 मिनट में आंखों और शरीर को आराम दिया जाए। फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार ही करें और सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बना लें। डिजिटल सुविधा का उपयोग जरूरी है, लेकिन संतुलन बनाए रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम एक धीमा जहर साबित हो सकता है, जिसका असर तुरंत नहीं, लेकिन समय के साथ गंभीर रूप में सामने आता है। सही समय पर सतर्कता ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
