फाॅलोअप : घोटाला उजागर होते ही विभावि में हड़कंप,गिरेबां बचाने में जुटे संलिप्त पदाधिकारी और कर्मी

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जून 2020 से मई 2023 तक के दर्जनभर पदाधिकारियों पर उठ रही उंगलियां

हजारीबाग। वित्त विभाग के अंकेक्षण रिपोर्ट में करीब 44 लाख का घोटाला उजागर होते ही इसमें संलिप्त विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के पदाधिकारियों और कर्मियों में हड़कंप मच गया है। सभी संलिप्त पदाधिकारी और कर्मी अपनी-अपनी गिरेबां बचाने की फिराक में लगे हैं। बताया जा रहा है कि जून 2020 से मई 2023 तक के दर्जनभर पदाधिकारियों की कहीं-न-कहीं संलिप्तता बताई जा रही है। उन पर उंगलियां भी उठ रही हैं। इनमें एक पदाधिकारी अब इस दुनिया में नहीं हैं और कई पदाधिकारी विभिन्न पदों पर वर्तमान में कार्यरत हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने विभिन्न बिंदुओं पर उठाए सवाल, कानूनी कार्रवाई की उठाई मांग

विश्वविद्यालय पर पैनीनिगाह रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राणा राहुल प्रताप का कहना कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित और उच्च शैक्षणिक संस्थान में गबन दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरा मानना है कि जो छात्र परीक्षा चोरी करते पकड़े जाते हैं उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया जाता है। ऐसा ही दंड गबन में भी होना चाहिए। सिर्फ वसूली से कुछ नहीं होनेवाला। दोषियों को किए गए गुनाह की कठोर सजा मिलनी चाहिए। चूंकि उन्होंने विद्यार्थियों और उनके हितों की जमा पूंजी का गबन किया है।
इसमें सिर्फ कोरम नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी लागू होनी चाहिए। कानूनी रूप से जांच पड़ताल होनी चाहिए, जून 2020 से मई 2023 तक कौन-कौन इन वाउचर तथा विपत्रों को हस्ताक्षर किया, अनुशंसा की और किन-किन लोगों ने इस वित्तीय अनियमितता के दायरे में आते हैं उनका भी नाम सामने आना चाहिए और उन्हें भी दंडित किया जाना चाहिए। इस पूरी कड़ी में मजेदार चीज यह है कि अल्पाहार ड्राई फ्रूट्स जहां से आ रहे हैं, उनका जीएसटी या पैन नंबर विपत्र में है या नहीं और वह संस्था धरातल पर है भी या नहीं ? बहुत सारी आपूर्ति क्लर्क और व्यक्तिगत खाते के माध्यम से कैसे किया गया जैसे यक्ष प्रश्न खड़ा होता है।

पड़ताल के बाद ही कुछ कहा जा सकता है : प्रो. डाॅ पवन कुमार पोद्दार

विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में 44 लाख के घोटाले पर वर्तमान वीसी प्रोफेसर डॉ पवन कुमार पोद्दार ने कहा कि उन्हें तो कोई खबर ही नहीं है। अखबारों में खबर आने के बाद उन्हें इस मामले की जानकारी मिली। पड़ताल के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यह उनके कार्यकाल का मामला भी नहीं है। वह अवकाश पर हैं। लौटने पर पूरी जानकारी ले पाएंगे। सामने जो मामला आएगा, उस पर छानबीन कर जानकारी दी जाएगी।
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Amarnath Pathak

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