
केंद्र सरकार ने हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलने और इसके ढांचे में बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस फैसले पर कांग्रेस सहित विपक्ष के नेता विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में काम के अधिकार को कमजोर कर सकता है। वहीं सत्तापक्ष के नेता इसे ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने का सकारात्मक प्रयास बता रहे हैं।
MANREGA की शुरुआत और उद्देश्य
MANREGA की शुरुआत 2 फ़रवरी 2006 को हुई थी। यह भारत सरकार का एक प्रमुख रोजगार गारंटी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को न्यूनतम 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
MANREGA में किए जाने वाले कार्य
MANREGA के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न सार्वजनिक कार्य किए जाते हैं। इनमें सड़क निर्माण, तालाब और नहरों की खुदाई, ग्रामीण जल आपूर्ति और सिंचाई संबंधी कार्य, खेतों और जंगलों की मरम्मत, सामुदायिक भवन निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार के साथ-साथ स्थायी अवसंरचना का लाभ भी मिलता है।
नाम बदलने का निर्णय

केंद्र सरकार के अनुसार, MANREGA का नाम बदलकर इसे और आधुनिक और सशक्त रूप देना है। हालांकि, विरोधी दलों का मानना है कि केवल नाम बदलने से रोजगार गारंटी और ग्रामीण विकास पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और इससे कानून की मूल भावना कमजोर हो सकती है।
विशेषज्ञों और जनता के बीच इस विषय पर बहस जारी है। कई लोगों का कहना है कि सरकार को कार्यक्रम के मूल उद्देश्य यानी रोजगार और ग्रामीण विकास को बनाए रखते हुए बदलाव करने चाहिए।
