गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित पारंपरिक ‘एट होम’ रिसेप्शन इस बार खास अंदाज में देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस वर्ष के एट होम समारोह की थीम देश के पूर्वोत्तर राज्यों की समृद्ध कला, संस्कृति और खानपान को समर्पित की। कार्यक्रम में पहुंचे विशिष्ट अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस भव्य आयोजन में पूर्वोत्तर भारत की झलक हर कोने में दिखाई दी। मेहमानों का स्वागत पारंपरिक पटके (गमछा) से किया गया, जो वहां की संस्कृति और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही पूरे परिसर को पूर्वोत्तर की लोककला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रतीकों से सजाया गया था।
एट होम रिसेप्शन में शामिल मेहमानों को असम, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। इन व्यंजनों में स्थानीय स्वाद और पारंपरिक पकाने की विधियों की झलक साफ दिखाई दी। मेहमानों ने पूर्वोत्तर के अनोखे फ्लेवर की जमकर सराहना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर देश की विविधता और एकता का संदेश देते हुए कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता में है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। इस विशेष आयोजन ने न सिर्फ गणतंत्र दिवस के उत्सव को और यादगार बना दिया, बल्कि देशवासियों को पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध विरासत से भी रूबरू कराया।
राष्ट्रपति के ‘एट होम’ में मेहमानों ने चखा पूर्वोत्तर के व्यंजनों का स्वाद, खास पारंपरिक स्वागत बना आकर्षण
