चार साल पहले सड़क के अभाव में गई थी सूरजी और नवजात की जान, आज भी नहीं बदली आदिवासी गांव की तस्वीर
वादे फाइलों में सिमटे, आज भी मरीजों को खाट पर ढोने को मजबूर ग्रामीण; सड़क के इंतजार में लक्ष्मीबथान


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