स्नान-ध्यान और तप का पावन पर्व: पौष पूर्णिमा संग शुरू हुआ माघ मास, श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी


स्नान, दान और संयम का प्रतीक माघ मास आज से विधिवत आरंभ हो गया। पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु भोर से ही गंगा, यमुना और त्रिवेणी संगम के घाटों पर पहुंचकर पुण्य स्नान करते नजर आए। मान्यता है कि माघ मास में नियमपूर्वक स्नान-ध्यान और संयमित जीवन अपनाने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति, मानसिक बल और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार माघ मास का विशेष महत्व बताया गया है। कहा गया है कि पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से लेकर माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी अथवा पूर्णिमा तक प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान करने से मनुष्य को श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से काशी में गंगा स्नान और प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसी आस्था के चलते पौष पूर्णिमा के दिन इन तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
काशी के घाटों पर सुबह से ही ‘हर-हर गंगे’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालु ठंडे जल में स्नान कर आरोग्य, सुख, शांति और परिवार के कल्याण की कामना करते दिखे। कई श्रद्धालुओं ने माघ मास के दौरान व्रत, जप-तप और दान का संकल्प भी लिया। प्रयागराज संगम क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर माघ स्नान का शुभारंभ किया।


काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं श्रीकाशी विद्वत परिषद के अखिल भारतीय संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार, धर्मशास्त्रों में माघ मास को अत्यंत पुण्यफलदायी बताया गया है। उन्होंने कहा कि इस मास में नियमपूर्वक स्नान, संयमित आहार-विहार और तपश्चर्या मानव जीवन को सहज, सरल और आध्यात्मिक चेतना से परिपूर्ण बनाती है। इससे न केवल लौकिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि पारलौकिक सुखों का मार्ग भी प्रशस्त होता है।.माघ मास को आत्मशुद्धि और आत्मबल बढ़ाने का काल माना जाता है। इस दौरान किए गए स्नान, दान और साधना से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि माघ स्नान से पापों का क्षय होता है और मन निर्मल होकर ईश्वर भक्ति में लीन होता है। इसी विश्वास के साथ आज से माघ मास का शुभारंभ पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ।

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