
प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले में उस समय एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब इटली से आईं युवती लुक्रेजिया अपने पिता के साथ सनातन परंपरा और भारतीय अध्यात्म को समझने यहां पहुंचीं। संगम की पावन रेती पर साधु-संतों के सानिध्य में बैठी लुक्रेजिया ने भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था और सम्मान प्रकट किया। विदेशी युवती को हाथ जोड़कर संतों को प्रणाम करते और पूरे भाव से ‘जय श्रीराम’ का जयकारा लगाते देख श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित और भावुक हो उठे। लुक्रेजिया ने बताया कि वह लंबे समय से भारतीय दर्शन, योग और सनातन धर्म के सिद्धांतों के बारे में जानने की इच्छा रखती थीं। इसी जिज्ञासा ने उन्हें अपने पिता के साथ प्रयागराज तक खींच लाया। माघ मेले के दौरान उन्होंने संतों से संवाद किया, ध्यान और साधना के महत्व को समझा और संगम स्नान के आध्यात्मिक अर्थ को जाना। उनके अनुसार, भारत की आध्यात्मिक परंपरा केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक गहन पद्धति है, जो मन और आत्मा को शांति प्रदान करती है।
साधु-संतों ने भी लुक्रेजिया और उनके पिता का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और भारतीय संस्कृति की मूल भावना ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के बारे में बताया। संतों का कहना था कि आज जब दुनिया भौतिकता की दौड़ में उलझी है, तब विदेशी नागरिकों का भारत आकर अध्यात्म की ओर आकर्षित होना इस बात का प्रमाण है कि सनातन परंपरा की जड़ें कितनी गहरी और सार्वभौमिक हैं।
माघ मेले में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए भी यह दृश्य खास रहा। संगम तट पर विदेशी युवती को भारतीय वेशभूषा में, हाथ जोड़कर ‘जय श्रीराम’ कहते देख लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बताया। लुक्रेजिया का यह अनुभव न केवल उनके लिए यादगार बन गया, बल्कि मेले में मौजूद हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणादायक क्षण साबित हुआ।
