गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव से पहले जारी हुई अंतिम मतदाता सूची ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल मिलाकर करीब 2.43 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम बहुल आठ जिलों में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि आदिवासी बहुल पांच जिलों में वोटरों की संख्या घटी है।आंकड़ों के इस अंतर ने राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिन जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, वहां जनसंख्या वृद्धि, नए मतदाताओं का पंजीकरण और स्थानांतरण जैसे कारण बताए जा रहे हैं। वहीं जिन क्षेत्रों में संख्या कम हुई है, वहां नामों के सत्यापन, दोहराव हटाने और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम विलोपित किए जाने को कारण माना जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में इस तरह के बदलाव का सीधा असर आगामी चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ने से वहां की सीटों पर मुकाबला और रोचक हो सकता है, जबकि आदिवासी बहुल इलाकों में घटती संख्या स्थानीय नेतृत्व और दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकती है।चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का संशोधन पूरी तरह निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन के आधार पर किया गया है। इसमें विशेष अभियान चलाकर दावों और आपत्तियों का निपटारा किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए नियमित अद्यतन प्रक्रिया अपनाई जाती है।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि वोटरों की संख्या में आए इस बदलाव का चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से इन आंकड़ों का विश्लेषण कर रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।
असम में 2.43 लाख वोटरों के नाम कटे, मुस्लिम बहुल जिलों में बढ़ी संख्या; सियासत में हलचल तेज
