Nitish Kumar बिहार की राजनीति के ऐसे नेता माने जाते हैं जिन्होंने लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहकर एक अलग राजनीतिक इतिहास रचा। खास बात यह है कि उनकी पार्टी Janata Dal (United) को कभी भी राज्य विधानसभा में पूर्ण बहुमत नहीं मिला, फिर भी वे गठबंधन राजनीति के सहारे वर्षों तक सत्ता के केंद्र में बने रहे।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, Nitish Kumar को एक बेहद चतुर और रणनीतिक नेता के रूप में देखा जाता है। उन्होंने अलग-अलग समय पर विभिन्न दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई और खुद को सत्ता में बनाए रखा। हालांकि उनके आलोचक इसे राजनीतिक अवसरवाद भी बताते हैं, जबकि समर्थक मानते हैं कि वे राजनीतिक साजिशों का शिकार हुए हैं।हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ नेता और समाज कल्याण मंत्री Madan Sahni ने भी मौजूदा घटनाक्रम पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है, उसे देखकर पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता स्तब्ध हैं। उनके मुताबिक यह मानना मुश्किल है कि यह फैसला खुद नीतीश कुमार का हो सकता है। उन्होंने कहा कि जेडीयू प्रमुख की लंबे समय से यह इच्छा रही है कि वे संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानसभा का प्रतिनिधित्व करें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए वे इस बार राज्यसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

इस बीच पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिली। पुलिस द्वारा मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोके जाने के बाद कुछ कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ भी की। कई समर्थकों को यह विश्वास ही नहीं हो रहा कि कभी प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार माने जाने वाले नेता का राजनीतिक सफर इस तरह समाप्त हो सकता है। पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे दिवंगत Sushil Kumar Modi जैसे भाजपा नेताओं ने भी अतीत में उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य बताया था।वहीं विपक्ष ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। Tejashwi Yadav ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बिहार में वही राजनीतिक रणनीति अपनाई है जो पहले महाराष्ट्र में देखने को मिली थी। उन्होंने कहा कि जब दोनों दलों का गठबंधन था तब उनकी पार्टी के पास ज्यादा विधायक होने के बावजूद उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर समर्थन दिया था, लेकिन उन्होंने दो बार गठबंधन तोड़ दिया।75 वर्ष के हो चुके Nitish Kumar के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। उस समय वे एक इंजीनियरिंग छात्र थे और राजनीति में उनकी रुचि बढ़ रही थी। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत महान समाजवादी नेता Jayaprakash Narayan के नेतृत्व में चले ऐतिहासिक JP Movement से की थी।हालांकि शुरुआती वर्षों में उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिली। लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 1985 में उन्होंने अपने गृह जिले नालंदा के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए।आज भले ही उनकी राजनीति को लेकर अलग-अलग राय हो, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि Bihar की राजनीति में Nitish Kumar का योगदान और प्रभाव लंबे समय तक याद किया जाएगा।
