
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचनों के माध्यम से न सिर्फ भक्ति का मार्ग दिखाते हैं, बल्कि जीवन को सही दिशा में ले जाने की सीख भी देते हैं। उनका मानना है कि ईश्वर से जुड़ने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है — भगवान के नाम का निरंतर स्मरण। हाल ही में एक सत्संग के दौरान एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से सवाल किया कि घर में पूजा करने और मंदिर जाकर पूजा करने में क्या अंतर होता है? इस पर महाराज जी ने बहुत ही सरल और गूढ़ उत्तर दिया।.उन्होंने कहा कि पूजा हर जगह फल देती है, लेकिन स्थान के अनुसार उसका प्रभाव अलग-अलग होता है।
महाराज जी के अनुसार —
घर में की गई 1000 माला का जप,
गौशाला में 100 माला जप के बराबर फल देता है।
वहीं, तीर्थ स्थान पर की गई एक माला, घर की 1000 माला के समान फल देती है।
और यदि वही जप वृंदावन में किया जाए, तो एक माला का फल एक लाख माला के बराबर माना जाता है।
प्रेमानंद जी महाराज ने आगे बताया कि इसी कारण लोग घर से बाहर निकलकर मंदिरों, तीर्थ स्थलों और धामों की यात्रा करते हैं। वहां का वातावरण, संतों की संगति और दिव्य ऊर्जा मन को शुद्ध करती है और साधना को कई गुना प्रभावशाली बना देती है।
उन्होंने कहा कि घर का भजन भी पुण्य देता है, लेकिन मंदिर और धाम में किया गया भजन आत्मा को अधिक शांति और ईश्वर से गहरा जुड़ाव प्रदान करता है। यही कारण है कि भक्त दूर-दूर से वृंदावन आते हैं और यहां की रज में अपने जीवन को धन्य मानते हैं।
