रिहर्सल, CIA का सोर्स और डेल्टा फोर्स… ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ में कैसे काराकास तक पहुंची अमेरिकी सेना


वैश्विक राजनीति और सैन्य रणनीति की दुनिया में गुप्त अभियानों को लेकर हमेशा रहस्य और रोमांच बना रहता है। इन्हीं चर्चाओं के बीच एक काल्पनिक लेकिन व्यापक रूप से चर्चित सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’ का जिक्र सामने आता है, जिसे अमेरिका की अब तक की सबसे साहसिक और जटिल गुप्त कार्रवाइयों में गिना जा रहा है। बताया जाता है कि इस ऑपरेशन की रूपरेखा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित आदेश पर तैयार की गई थी, जिसमें खुफिया एजेंसी CIA और स्पेशल फोर्सेज की अहम भूमिका मानी गई। इस परिदृश्य के अनुसार, ऑपरेशन की शुरुआत महीनों पहले ही हो चुकी थी। CIA ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गतिविधियों, सुरक्षा व्यवस्था और मूवमेंट पर गहन निगरानी रखी। स्थानीय सूत्रों, तकनीकी सर्विलांस और सैटेलाइट इंटेलिजेंस के जरिए हर छोटे-बड़े पहलू की जानकारी जुटाई गई। कहा जाता है कि मादुरो के आवास और आसपास के सुरक्षा घेरे का अमेरिका में हूबहू मॉडल तैयार किया गया, ताकि सैनिक वास्तविक हालात में कार्रवाई से पहले कई बार रिहर्सल कर सकें।


इस कथित ऑपरेशन में अमेरिकी डेल्टा फोर्स जैसी एलीट यूनिट को अग्रिम पंक्ति में रखा गया। अत्याधुनिक हथियारों, नाइट-विज़न सिस्टम और ड्रोन सपोर्ट के साथ मिशन को बेहद सीमित समय में अंजाम देने की योजना बनाई गई। रिपोर्टनुमा दावों के मुताबिक, 150 से अधिक विमान और विभिन्न स्पेशल फोर्सेज यूनिट्स लॉजिस्टिक और एयर सपोर्ट में तैनात थीं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।.रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा कोई ऑपरेशन वास्तव में होता, तो यह आधुनिक सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देता। यह दिखाता कि कैसे खुफिया नेटवर्क, तकनीक और स्पेशल फोर्सेज के समन्वय से किसी भी देश के भीतर सटीक और सीमित कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इस पूरे परिदृश्य को लेकर किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं है और इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गुप्त अभियानों की संभावनाओं पर आधारित विश्लेषण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

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