
नए साल की शुरुआत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। हाल ही में हुई हड़ताल के बाद केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स—जैसे स्विगी, जोमैटो, उबर, ओला और अन्य ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों—के लिए सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इस ड्राफ्ट के लागू होने से लाखों गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, यदि कोई गिग वर्कर किसी एक ऐप पर एक साल में कम से कम 90 दिन काम करता है, तो वह सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आ जाएगा। इसके तहत उसे हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट कवर जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं दी जाएंगी। वहीं, जो वर्कर एक से ज्यादा प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं, उनके लिए न्यूनतम कार्य अवधि 120 दिन तय की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि काम की गिनती उस दिन से शुरू होगी, जब वर्कर ने पहली बार उस प्लेटफॉर्म से कमाई की हो। यह कमाई कितनी भी हो सकती है, इसके लिए किसी न्यूनतम राशि की शर्त नहीं रखी गई है। यानी पहली बार एक भी ऑर्डर या राइड पूरी करने के साथ ही कार्य अवधि की गणना शुरू मानी जाएगी। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य गिग इकोनॉमी से जुड़े वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना है। लंबे समय से गिग वर्कर्स स्थायी नौकरी, बीमा और सुरक्षा कवच की मांग कर रहे थे, जिसे लेकर हाल ही में कई शहरों में प्रदर्शन और हड़ताल भी देखने को मिली थी।फिलहाल यह नियम ड्राफ्ट चरण में हैं और इस पर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे जाएंगे। अंतिम रूप दिए जाने के बाद इन्हें लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे गिग वर्कर्स के कामकाजी हालात में बड़ा बदलाव आ सकता है।
