‘बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी…’

‘बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी…’ यह पंक्ति केवल शब्द नहीं, बल्कि उस असहनीय पीड़ा की तस्वीर है जिससे वेदांता ग्रुप के चेयरमैन और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल इस समय गुजर रहे हैं। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल के असामयिक निधन की खबर ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि उद्योग जगत को भी गहरे शोक में डुबो दिया है। जानकारी के अनुसार, अग्निवेश अग्रवाल अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्कीइंग के दौरान एक गंभीर हादसे का शिकार हो गए थे। हादसे के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने लंबे समय तक उनका इलाज किया। परिवार और शुभचिंतकों को उम्मीद थी कि अग्निवेश इस कठिन दौर से उबर जाएंगे, लेकिन इलाज के दौरान अचानक कार्डियक अरेस्ट आने से उनकी मृत्यु हो गई।


बेटे के निधन से टूट चुके अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि बेटे की अर्थी को कंधा देना किसी भी पिता के लिए सबसे बड़ा दुख होता है। उन्होंने कहा कि अग्निवेश केवल उनका बेटा ही नहीं, बल्कि उनके सपनों का हिस्सा था। अनिल अग्रवाल ने भावुक शब्दों में यह भी कहा कि वे अपने बेटे के सपनों को अधूरा नहीं रहने देंगे और जिस उद्देश्य व सोच के साथ अग्निवेश आगे बढ़ रहा था, उसे वे आगे ले जाएंगे।
इस दुखद घटना के बाद उद्योग जगत, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने अनिल अग्रवाल और उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है। हर कोई इस बात से व्यथित है कि इतनी कम उम्र में एक होनहार युवा की जीवन यात्रा थम गई। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अग्निवेश पढ़ाई और सामाजिक कार्यों में गहरी रुचि रखते थे और भविष्य को लेकर कई योजनाएं बना रहे थे।
बेटे की मौत ने अनिल अग्रवाल के जीवन में एक ऐसा खालीपन छोड़ दिया है जिसे भर पाना आसान नहीं है। फिर भी, उन्होंने जिस साहस और संकल्प के साथ बेटे के सपनों को आगे बढ़ाने की बात कही है, वह उनके मजबूत व्यक्तित्व को दर्शाता है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सफलता, संपत्ति और ऊंचा कद भी जीवन के सबसे बड़े दुखों से इंसान को नहीं बचा सकते।

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