कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव का स्थान नहीं ले सकता, यह मानव का साधन मात्र है: कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्माकृत्रिम बुद्धिमत्ता कभी भी मानव का विकल्प नहीं बन सकता। इसे मानव जीवन को और उन्नत करने का नवीनतम साधन (tool) के रूप में विकसित किया जा सकता है। उक्त बातें विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने शनिवार को कही। वह विभावि के राजनीति विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा बनाया गया दीवार पत्रिका (वॉल मैगजीन) का अनावरण करने के उपरांत विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कुलपति ने बताया कि यह उनकी दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक विषय पर इतना विशाल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन करने वाला पहला राष्ट्र बना।उन्होंने आगे बताया कि मानव के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता की कोई तुलना नहीं हो सकती है। मानव की श्रेष्ठता बनी रहेगी। आवश्यकता है कि मानव कृत्रिम बुद्धिमत्ता का सदुपयोग करें इसका दुरुपयोग से बच्चे।भारतीय ज्ञान परंपरा से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विषय को जोड़ते हुए उन्होंने जानना चाहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से क्या हम वेद और उपनिषद जैसे ज्ञान का भंडार तैयार कर सकते हैं? उन्होंने बताया कि भारत के पास जो ज्ञान का भंडार है उसकी पूर्ण एवं सूक्ष्म व्याख्या यंत्र नहीं कर सकता। उस ज्ञान की व्याख्या उन्नत मानव द्वारा ही संभव है। भारतीय धर्म शास्त्रों से उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ‘सर्वे भवंतु सुखिन…’ जैसे शाश्वत मंत्रो के सही अर्थ मशीन कभी नहीं बता सकता। इस संबंध में उन्होंने नोआम चोम्स्की की थ्योरी ऑफ़ जेनरेटिव ग्रामर का हवाला देते हुए बताया की ‘व्याकरण’ और ‘अर्थ’ दो अलग-अलग विषय है। मशीन ‘ग्रामर’ को समझता है लेकिन उसके सूक्ष्म’ अर्थ’ और भावार्थ की व्याख्या मानव द्वारा ही संभव होगा।कुलपति ने विभाग के विद्यार्थियों द्वारा एक समसामयिक विषय पर दीवार पत्रिका बनाए जाने कि सराहना की। अखबारों के कटिंग्स की गुणवत्ता से भी वे प्रभावित दिखे। इस अवसर पर विभाग के अध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा, डॉ अजय बहादुर सिंह, अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ देवनारायण राम, विभाग के शोधार्थी एवं प्रथम समसत्र के विद्यार्थी अच्छी संख्या में उपस्थित थे।
विभावि के राजनीति विज्ञान विभाग के दीवार पत्रिका का कुलपति ने किया अनावरण
