क्या Instagram आपकी बातें सुन रहा है? जानिए क्यों दिखते हैं इतने पर्सनल ऐड्स और कैसे बच सकते हैं

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आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। खासकर इंस्टाग्राम, जहां लोग अपनी तस्वीरें, वीडियो और रोजमर्रा की गतिविधियां साझा करते हैं। लेकिन अक्सर यूज़र्स के मन में एक सवाल उठता है कि इंस्टाग्राम पर दिखने वाले विज्ञापन इतने पर्सनल क्यों होते हैं? कई बार ऐसा महसूस होता है मानो ऐप हमारी बातें सुन रहा हो या हमारे दिमाग को पढ़ रहा हो।
दरअसल, इसकी सच्चाई कुछ और है। इंस्टाग्राम या कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आपकी आवाज़ नहीं सुनता, बल्कि वह आपकी ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर आपके इंटरेस्ट को समझता है। आप कौन-से पोस्ट लाइक कर रहे हैं, किन वीडियो पर ज्यादा समय बिता रहे हैं, किस तरह के पेज फॉलो कर रहे हैं या किस तरह की चीजें सर्च कर रहे हैं—इन सभी चीजों का डेटा एल्गोरिदम के जरिए एनालिसिस किया जाता है। इसके बाद आपको उसी तरह के विज्ञापन दिखाए जाते हैं, जिससे ऐसा लगता है कि ऐड्स बेहद पर्सनल हैं। इसके अलावा, कई बार हम किसी दोस्त से किसी प्रोडक्ट या जगह के बारे में बात करते हैं और थोड़ी देर बाद वही चीज इंस्टाग्राम पर विज्ञापन के रूप में दिखने लगती है। यह संयोग भी हो सकता है, क्योंकि उस विषय से जुड़ी सर्च या कंटेंट पहले ही हमारे फोन में मौजूद होता है। इसके पीछे मोबाइल ऐप्स की परमिशन, ब्राउज़िंग हिस्ट्री और लोकेशन डेटा भी अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, यूजर्स चाहें तो अपने इंस्टाग्राम पर दिखने वाले पर्सनल ऐड्स को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। इसके लिए ऐप की सेटिंग्स में जाकर एड प्रेफरेंस बदले जा सकते हैं, ऑफ-एक्टिविटी ट्रैकिंग को सीमित किया जा सकता है और थर्ड पार्टी ऐप्स को दी गई अनावश्यक परमिशन हटाई जा सकती है। इसके अलावा, गूगल अकाउंट और मेटा अकाउंट की ऐड सेटिंग्स को भी समय-समय पर चेक करना जरूरी है। डिजिटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूजर्स को सोशल मीडिया पर अपनी प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। जितनी ज्यादा जानकारी हम ऑनलाइन साझा करेंगे, उतना ही ज्यादा डेटा प्लेटफॉर्म्स के पास जाएगा। इसलिए जरूरी है कि हम सोच-समझकर ऐप्स को परमिशन दें और समय-समय पर अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को अपडेट करते रहें। कुल मिलाकर, इंस्टाग्राम आपकी बातें नहीं सुनता, लेकिन आपकी ऑनलाइन आदतों को बारीकी से समझकर उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाता है। थोड़ी सी जागरूकता से आप अपने डिजिटल अनुभव को ज्यादा सुरक्षित और निजी बना सकते हैं।

Amarnath Pathak

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