13वीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति ओरिएंटेशन और सेंसिटाईजेसन कार्यक्रम का सफल आयोजन

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भारतीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (IITE), गांधीनगर, गुजरात स्थित यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा 13वें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम का आयोजन विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग (झारखंड) के शिक्षा विभाग के सहयोग से शनिवार को संपन्न किया गया। उक्त विषय की जानकारी देते हुए कार्यक्रम समन्वयक तथा शिक्षाशास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ रजनीश कुमार ने बताया कि यह दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑनलाइन मोड में आयोजित हुआ।

यह कार्यक्रम भारत सरकार का मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (MMTTP) के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों, दृष्टिकोण और प्रभावी कार्यान्वयन से संबंधित पहलुओं पर शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं उच्च शिक्षा से जुड़े प्रतिभागियों को संवेदनशील एवं जागरूक बनाना है। कार्यक्रम के दौरान एनइपी (NEP) 2020 के शैक्षिक सुधार, शिक्षक शिक्षा, पाठ्यक्रम संरचना, समावेशी शिक्षा के स्वरूप, नवाचार तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े विविध विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा सारगर्भित व्याख्यान दिए गए।

कार्यक्रम का शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रो. आर. सी. पटेल, कुलपति, भारतीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान, गांधीनगर तथा प्रो चंद्र भूषण शर्मा, कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग द्वारा किया जा रहा है। दोनों ही शिक्षाविदों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं सुचारु संचालन में प्रो. दिव्या शर्मा, निदेशक, MMTTC, IITE, गांधीनगर, डॉ. हेमंत मौर्य, उप-निदेशक, MMTTC, IITE, गांधीनगर तथा डॉ. रजनीश कुमार, कार्यक्रम समन्वयक, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

साथ ही, आयोजन समिति के सदस्य के रूप में डॉ. अमिता कुमारी एवं डॉ. विनिता बनकिरा द्वारा कार्यक्रम के सुगम, सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन हेतु निरंतर समन्वय एवं सक्रिय योगदान प्रदान किया गया।

उल्लेखनीय है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क था तथा देशभर के शिक्षक, शोधार्थी एवं शिक्षाविद् इसमें ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता सुनिश्चित किए।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने तथा शिक्षकों को नवीन शैक्षिक परिवर्तनों के अनुरूप सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल रहा।

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