शहर की पहचान और ‘हृदय स्थली’ मानी जाने वाली हजारीबाग झील की चौथी झील इन दिनों बदहाल स्थिति में है। जहां प्रतिदिन हजारों लोग सुबह-शाम स्वच्छ हवा, टहलने, व्यायाम और मेडिटेशन के लिए पहुंचते हैं, वहीं चौथी झील का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढका हुआ है। हालात ऐसे हैं कि झील की सतह मैदान जैसी प्रतीत होती है।स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस झील की समुचित सफाई नहीं हुई है। नगर निगम द्वारा अन्य झीलों और आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्य किए जा रहे हैं और वर्तमान में करोड़ों रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण कार्य भी जारी है, लेकिन चौथी झील उपेक्षित पड़ी है। जलकुंभी की मोटी परत के कारण यदि कोई व्यक्ति फिसलकर झील में गिर जाए तो उसे ढूंढना और बाहर निकालना बेहद कठिन हो सकता है। इससे सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।चौथी झील के किनारे राष्ट्रपिता Mahatma Gandhi की भव्य प्रतिमा स्थापित है, लेकिन आसपास की वीरानी और गंदगी के कारण वहां लोगों का आना-जाना कम हो गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सुनसान माहौल का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों ने आसपास के क्षेत्र को नशे का अड्डा बना लिया है। शाम ढलते ही यहां विभिन्न प्रकार के नशे का सेवन खुलेआम होता है, जिससे आम लोगों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।इलाके के निवासियों ने स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग भी लंबे समय से की है। उनका कहना है कि पर्याप्त रोशनी और नियमित सफाई से न केवल झील की सुंदरता लौटेगी, बल्कि असामाजिक गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा।स्थानीय लोगों का मानना है कि झील केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर की धरोहर है। इसे संरक्षित करना प्रशासन और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि चौथी झील की तत्काल सफाई कर जलकुंभी हटाई जाए, नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए और गांधी प्रतिमा के आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाया जाए।अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘हृदय स्थली’ को उसकी पुरानी पहचान और गरिमा कब तक लौटा पाता है।
हजारीबाग की ‘हृदय स्थली’ चौथी झील उपेक्षित: जलकुंभी से पटी सतह, गांधी प्रतिमा के पास बढ़ रही अर्थव्यवस्था
