
नई दिल्ली।
अंतरिक्ष में बढ़ते खतरे को लेकर एक बार फिर चिंता गहराने लगी है। स्पेसएक्स का स्टारलिंक सैटेलाइट 17 दिसंबर को नियंत्रण खोने के बाद अनियंत्रित रूप से अंतरिक्ष में घूमता हुआ पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह सैटेलाइट जल्द ही पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो जाएगा।
हालांकि, यह घटना सिर्फ एक सैटेलाइट तक सीमित नहीं मानी जा रही है। एक नई रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि यदि बड़ी संख्या में सैटेलाइट्स नियंत्रण खो देते हैं, तो इससे केसलर सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति में अंतरिक्ष में मौजूद मलबा एक-दूसरे से टकराने लगता है, जिससे और अधिक मलबा पैदा होता है और पूरी कक्षा (ऑर्बिट) असुरक्षित हो जाती है।

रिसर्च के अनुसार, अगर ऐसी स्थिति बनी तो महज 2.8 दिनों के भीतर अंतरिक्ष में टकराव की श्रृंखला शुरू हो सकती है। इसका सीधा असर धरती पर रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। इंटरनेट सेवाएं, जीपीएस नेविगेशन, बैंकिंग सिस्टम, मौसम पूर्वानुमान और संचार नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी की कक्षा में तेजी से बढ़ते सैटेलाइट्स और अंतरिक्ष मलबे पर नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त नियम और निगरानी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी बड़े तकनीकी संकट से बचा जा सके।
