भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने जा रहे ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस डील से अमेरिका नाराज़ नजर आ रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ मंत्री ने तीखा बयान देते हुए कहा है कि यूरोप भारत के साथ व्यापार कर अप्रत्यक्ष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के इस बयान को भारत-EU रिश्तों के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत से ऊर्जा और अन्य वस्तुओं के व्यापार के ज़रिए यूरोप ऐसे संसाधन जुटा रहा है, जिनका इस्तेमाल युद्ध से जुड़ी गतिविधियों में हो सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक कूटनीति में नई बहस छिड़ गई है।
इधर, दिल्ली में आज 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, जहां दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), डिफेंस कोऑपरेशन, और मोबिलिटी पार्टनरशिप पर अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता भारत और यूरोप के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस डील से भारत को निवेश, टेक्नोलॉजी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं यूरोप को एशियाई बाजार में मजबूत पकड़ बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि अमेरिका की नाराजगी यह साफ संकेत दे रही है कि वैश्विक व्यापार अब सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि भू-राजनीति का भी बड़ा हथियार बन चुका है। भारत सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
India-EU ट्रेड डील से अमेरिका नाराज़, ट्रंप के मंत्री का बड़ा बयान—‘यूरोप खुद अपने खिलाफ जंग को फंड कर रहा’
