नई दिल्ली:इतिहास में 30 जनवरी की तारीख एक ऐसे शख्स से जुड़ी है, जिसने अपने फैसलों से पूरी दुनिया को तबाही की ओर धकेल दिया। आज ही के दिन साल 1933 में एडोल्फ हिटलर को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया गया था। यही वह मोड़ था, जहां से दुनिया ने दूसरे विश्वयुद्ध की ओर कदम बढ़ाया।हिटलर के सत्ता में आने के बाद जर्मनी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। धीरे-धीरे उसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया और तानाशाही शासन की नींव रखी। इसके बाद नाजी विचारधारा को देशभर में लागू किया गया, जिसने नस्लवाद, यहूदी विरोध और हिंसा को बढ़ावा दिया।हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी ने सैन्य शक्ति को तेजी से मजबूत किया और पड़ोसी देशों पर आक्रमण की नीति अपनाई। इसी आक्रामक सोच ने वर्ष 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध को जन्म दिया, जिसमें करोड़ों लोग मारे गए और कई देश तबाही के कगार पर पहुंच गए।इतिहासकारों के अनुसार, हिटलर का सत्ता में आना सिर्फ जर्मनी ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी था कि जब लोकतंत्र कमजोर होता है और कट्टर विचारधाराएं हावी होती हैं, तो उसका परिणाम विनाश के रूप में सामने आता है।आज भी 30 जनवरी का दिन यह याद दिलाता है कि सत्ता का दुरुपयोग और नफरत की राजनीति मानवता के लिए कितनी घातक साबित हो सकती है।
आज ही के दिन हिटलर बना था जर्मनी का चांसलर, फिर दुनिया को झोंक दिया गया महायुद्ध में
