सर्दी में अलाव की आग बन सकती है बीमारी की वजह, लकड़ी के धुएं से रहें सावधान


सर्दियों के मौसम में ठंड से बचने के लिए गांव–शहरों में जगह-जगह लकड़ी, कोयला या उपलों से आग जलाकर तापना आम बात है। सुबह-शाम अलाव के आसपास बैठकर लोग खुद को राहत महसूस करते हैं, लेकिन यही राहत धीरे-धीरे सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। लकड़ियों के जलने से निकलने वाला धुआं केवल आंखों में जलन या खांसी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से शरीर के भीतर गहरी बीमारियां पनप सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लकड़ी के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, महीन कण (पार्टिकुलेट मैटर) और जहरीली गैसें होती हैं, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंचती हैं। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। बुजुर्गों और बच्चों में यह खतरा और भी अधिक होता है, क्योंकि उनका श्वसन तंत्र पहले से ही संवेदनशील होता है। लगातार धुएं में बैठने से फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और गंभीर मामलों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।


केवल फेफड़े ही नहीं, बल्कि यह धुआं दिल पर भी असर डालता है। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने से हृदय संबंधी रोग, ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है। आंखों में जलन, लालिमा और पानी आना आम लक्षण हैं, लेकिन अगर इन्हें नजरअंदाज किया जाए तो दृष्टि से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। वहीं त्वचा पर इसका असर खुजली, एलर्जी और समय से पहले झुर्रियों के रूप में देखने को मिलता है। घर के अंदर या बंद जगहों पर अलाव जलाना सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। कई बार लोग ठंड से बचने के लिए कमरे में ही अंगीठी या आग जलाकर बैठ जाते हैं, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जमा हो जाती है। यह गैस बिना गंध की होती है और व्यक्ति को पता भी नहीं चलता, लेकिन इसके कारण चक्कर आना, सिरदर्द, बेहोशी और यहां तक कि जान का खतरा भी हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में अचानक तबीयत बिगड़ने या सांस फूलने के पीछे कई बार यही कारण छिपा होता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि ठंड से बचाव के लिए सुरक्षित उपाय अपनाएं। खुले स्थान में ही अलाव जलाएं, धुएं से दूरी बनाकर रखें और बच्चों व बुजुर्गों को इससे दूर रखें। गर्म कपड़े, कंबल और हीटर जैसे सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल बेहतर है। थोड़ी-सी सावधानी आपको गंभीर बीमारी से बचा सकती है।

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