क्या बिच्छू को अपनी मौत का पहले से होता है आभास? वायरल दावे की सच्चाई जानिए

सोशल मीडिया और लोककथाओं में अक्सर यह दावा किया जाता है कि बिच्छू एकमात्र ऐसा जीव है, जिसे अपनी मौत के बारे में पहले ही पता चल जाता है। कहा जाता है कि जब बिच्छू को यह एहसास हो जाता है कि उसकी मृत्यु निकट है, तो उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगता है। वह असामान्य रूप से आक्रामक हो जाता है या अजीब हरकतें करने लगता है, जिससे लोगों को लगता है कि उसे अपने अंत का आभास हो चुका है।ग्रामीण इलाकों और पुरानी मान्यताओं में यह विश्वास काफी प्रचलित है कि बिच्छू खतरे को पहले ही भांप लेता है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब बिच्छू को चारों ओर से घेर लिया जाता है या आग से जलाया जाता है, तो वह खुद को डंक मारकर अपनी जान ले लेता है। इसी धारणा के आधार पर यह मान्यता बनी कि बिच्छू अपनी मौत को खुद चुनता है।हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस दावे को पूरी तरह सही नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, बिच्छू का जहर उसी पर असर नहीं करता, यानी वह खुद को डंक मारकर नहीं मर सकता। दरअसल, जब बिच्छू को अत्यधिक गर्मी या खतरे का सामना करना पड़ता है, तो उसका तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है और वह अनियंत्रित गतिविधियां करने लगता है। इसी कारण लोगों को यह भ्रम होता है कि वह जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचा रहा है।वैज्ञानिकों का मानना है कि बिच्छू का यह व्यवहार आत्मरक्षा या तनाव की प्रतिक्रिया हो सकता है, न कि अपनी मौत का पूर्वाभास। बावजूद इसके, अपने जहरीले डंक, अनोखे व्यवहार और जीवटता के कारण बिच्छू आज भी इंसानों के लिए एक रहस्यमयी जीव बना हुआ है, जिसके बारे में कई मिथक और कहानियां प्रचलित हैं।

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