‘योगी-मोदी का अपमान बर्दाश्त नहीं’, एक और सरकारी अफसर ने दिया इस्तीफा, सियासी हलकों में मचा हड़कंप


उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रहे विवाद का असर अब प्रशासनिक महकमे तक पहुंचता नजर आ रहा है। अयोध्या संभाग में तैनात जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई कथित विवादित टिप्पणी से वह मानसिक रूप से बेहद आहत हैं और इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। प्रशांत कुमार सिंह ने अपने त्यागपत्र में साफ तौर पर लिखा है कि वह पिछले तीन दिनों से मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर ‘औरंगजेब’ जैसी टिप्पणी की है, वह न केवल एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपमान है, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता का भी अपमान है। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश का वह नमक खाते हैं और जहां से वेतन पाते हैं, उस प्रदेश के मुखिया के खिलाफ एक शब्द भी वह सहन नहीं कर सकते। अपने इस्तीफे में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। किसी भी संवैधानिक पद या धार्मिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वे इस अपमान के खिलाफ आवाज नहीं उठाते, तो यह उनके आत्मसम्मान और कर्तव्य दोनों के खिलाफ होगा। इस घटनाक्रम ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सामने आया कि इससे पहले भी इसी विवाद को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। बरेली के जिलाधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भी शंकराचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चले विवाद के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यूजीसी नियमों और मुख्यमंत्री के अपमान को लेकर असहमति जताई थी। हालांकि बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
लगातार दो वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत आस्था और विचारधारा से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक मर्यादा से जुड़ा गंभीर मामला मान रहे हैं। फिलहाल, प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे पर सरकार या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, पुलिस और प्रशासन इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रशासन, राजनीति और धर्म के बीच संतुलन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

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