बिना हाथों वाली दुर्लभ छिपकली ने चौंकाया वैज्ञानिकों को, ऑस्ट्रेलिया में मिली नई प्रजाति


दुनिया में आज भी कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जिनसे इंसान अनजान है। प्रकृति समय-समय पर ऐसे जीवों से पर्दा उठाती है, जो विज्ञान के लिए भी हैरानी का कारण बन जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है ऑस्ट्रेलिया से, जहां वैज्ञानिकों को बिना हाथों वाली एक दुर्लभ छिपकली मिली है। इस खोज ने वैज्ञानिक समुदाय को चौंका दिया है। ऑस्ट्रेलियन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने गल्फ ऑफ कार्पेंटेरिया क्षेत्र में स्लाइडर स्किंक की एक नई प्रजाति खोजी है। इस छिपकली को वैज्ञानिक नाम Lerista munuwajarlu दिया गया है। भारत में स्किंक को आमतौर पर बभनी कहा जाता है, जिसे बच्चे अक्सर “सांप की मौसी” कहकर पहचानते हैं।
🔹 बिना हाथ, सिर्फ पीछे के पैर
इस अनोखी छिपकली की सबसे खास बात यह है कि इसके आगे के पैर बिल्कुल नहीं होते, जबकि पीछे के पैर बेहद छोटे होते हैं। इसका शरीर पूरी तरह सांप जैसा दिखता है, लेकिन यह छिपकली की प्रजाति से संबंध रखती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विकास की एक अनोखी प्रक्रिया का उदाहरण है।
🔹 10 साल में दो बार दिखी
इस दुर्लभ जीव को 10 साल के अंतराल में केवल दो बार देखा गया है। यह ऑस्ट्रेलियन वाइल्डलाइफ कंजर्वेंसी के पुंगालिना सेवन ईमू वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में पाया गया, जो गल्फ ऑफ कार्पेंटेरिया क्षेत्र में स्थित है। यह इलाका बेहद कम खोजा गया है, इसलिए यहां जैव विविधता से जुड़े कई रहस्य अब भी छिपे हैं।
🔹 नाम के पीछे की कहानी
इस प्रजाति का नाम Lerista munuwajarlu रखा गया है, जो स्थानीय गर्रवा भाषा से लिया गया है।
मुनुवा का अर्थ है – नहीं
जार्लू का अर्थ है – हाथ
यानी इसका मतलब हुआ — बिना हाथ वाली छिपकली।
🔹 वैज्ञानिकों की राय
नॉर्थ ऑस्ट्रेलिया में लंबे समय से रिसर्च कर रहीं वैज्ञानिक डॉ. एरिडानी मुल्डर का कहना है कि इस क्षेत्र में अब भी कई प्रजातियां खोजे जाने की प्रतीक्षा में हैं। जेनेटिक स्टडी से यह भी सामने आया है कि यह प्रजाति अन्य बभनियों की तुलना में काफी अलग और दूर की रिश्तेदार है।
बताया गया कि Lerista प्रजाति की करीब 98 किस्में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती हैं, जो इस देश की जैव विविधता को और भी खास बनाती हैं।

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