अमेरिका ने रूसी झंडा लगे तेल टैंकर को किया जब्त, बढ़ी वैश्विक महाशक्तियों के बीच तनातनी


वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर उपजा तनाव अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अमेरिका ने एक और आक्रामक कदम उठाते हुए बुधवार को उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडा लगे एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया। इस टैंकर के साथ उसकी सुरक्षा में रूसी पनडुब्बी भी चल रही थी, जिससे यह कार्रवाई और अधिक संवेदनशील हो गई। अमेरिका के इस कदम के बाद अमेरिका और रूस के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। रूस की ओर से इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। रूसी संसद के वरिष्ठ सदस्य आंद्रेई क्लिशास ने इसे खुले तौर पर “समुद्री डकैती” करार दिया है। वहीं, व्हाइट हाउस ने अपने रुख को सख्त बताते हुए कहा है कि अमेरिका अपने लगाए गए सभी प्रतिबंधों को पूरी सख्ती के साथ लागू करेगा और उनका उल्लंघन करने वाले किसी भी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने कैरिबियन सागर में एक अन्य तेल टैंकर पर भी कब्जा कर लिया। अमेरिकी यूरोपीय कमान ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि व्यापारिक पोत बेला-1 (मरीनरा) को अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में जब्त किया गया है। अमेरिका का कहना है कि वह पिछले एक महीने से इस टैंकर पर नजर बनाए हुए था, क्योंकि यह वेनेजुएला के आसपास प्रतिबंधित जहाजों पर लगाई गई अमेरिकी नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था। अब यह टैंकर अमेरिकी तटरक्षक बल के नियंत्रण में है। इसके बाद अमेरिका की गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने कैरिबियन सागर में टैंकर सोफिया को भी अपने कब्जे में ले लिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, दोनों जहाज या तो हाल ही में वेनेजुएला में रुके थे या फिर वहां जाने की तैयारी में थे। इन दोनों जहाजों को उन प्रतिबंधित पोतों के तथाकथित “गुप्त बेड़े” का हिस्सा बताया जा रहा है, जो पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए रूस, ईरान और वेनेजुएला से तेल लेकर मुख्य रूप से एशियाई बाजारों तक पहुंचाते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी टैंकर की जब्ती इस बात का संकेत है कि अमेरिका राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद भी वेनेजुएला के तेल व्यापार पर अपनी नाकेबंदी जारी रखना चाहता है। तेल निर्यात से होने वाली आय वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। ऐसे में इसके निर्यात पर सख्ती से अंकुश लगाने का उद्देश्य मादुरो की उत्तराधिकारी डेल्सी रोड्रिग्ज पर दबाव बनाना माना जा रहा है।
अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी बुधवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका अनिश्चित काल तक वेनेजुएला के तेल व्यापार की निगरानी करता रहेगा। इस बीच ब्रिटेन ने भी स्वीकार किया है कि उसने तेल टैंकर को जब्त करने के अमेरिकी अभियान में अमेरिका को सहायता प्रदान की। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, अमेरिका के अनुरोध पर उसकी सशस्त्र सेनाओं ने पूर्व-नियोजित परिचालन सहायता दी, जिसमें सैन्य अड्डों पर तैनाती जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल थीं।
अंतरराष्ट्रीय नियमों और समुद्री कानूनों को दरकिनार कर जिस तरह अमेरिका लगातार सैन्य और रणनीतिक कार्रवाई कर रहा है, उससे वैश्विक संकट के और गहराने की आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

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