देश की राजधानी दिल्ली से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कानून-व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। दक्षिणी दिल्ली के वसंत एन्क्लेव इलाके में भारतीय सेना के एक ब्रिगेडियर और उनके बेटे के साथ सरेआम मारपीट की गई—वह भी तब, जब पुलिस मौके पर मौजूद थी। यह घटना न सिर्फ हैरान करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर आम नागरिक की सुरक्षा का क्या हाल होगा, जब सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं।मिली जानकारी के अनुसार, ब्रिगेडियर ने कुछ लोगों को सार्वजनिक स्थान पर शराब पीने से मना किया था। बस यही बात दबंगों को नागवार गुजरी और देखते ही देखते मामूली सी कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि उन लोगों ने अपने साथियों को मौके पर बुला लिया और फिर ब्रिगेडियर व उनके बेटे पर हमला कर दिया।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने ब्रिगेडियर के बेटे को बेरहमी से पीटा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। वहीं ब्रिगेडियर के साथ भी धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के दौरान पुलिस मौजूद थी, लेकिन बावजूद इसके मारपीट होती रही, जिसने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। घायल बेटे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।यह घटना समाज के सामने एक कड़वी सच्चाई रखती है कि कानून का डर कुछ लोगों के दिलों से खत्म होता जा रहा है। जब सार्वजनिक स्थान पर नियमों का पालन कराने की कोशिश करने वाले व्यक्ति—वह भी सेना का अधिकारी—इस तरह की हिंसा का शिकार हो जाए, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन जाती है।दिल्ली की यह घटना सिर्फ एक मारपीट नहीं, बल्कि यह कानून व्यवस्था, सामाजिक अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है—जिसका जवाब अब व्यवस्था को देना होगा।
“वर्दी का मान भी न बचा: ब्रिगेडियर को सरेआम पीटा, बेटे पर बरसी दबंगों की बर्बरता!”
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Amarnath Pathak
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