देवघर, झारखंड:-राजकीय श्रावणी मेला 2025 ने इस बार श्रद्धालुओं को भक्ति और तकनीक के अद्भुत संगम का साक्षी बनने का अवसर दिया। पहली बार मेले के इतिहास में एक विशेष ड्रोन शो का आयोजन किया गया, जिसने न केवल बाबा बैद्यनाथ धाम की पौराणिक महिमा को आकाश में सजीव किया, बल्कि श्रावणी मेले की परंपरा और ज्योतिर्लिंग की दिव्यता को भी रोशनी के माध्यम से दर्शाया।

शिवभक्तों से गूंजा आसमान, ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से हुआ शुभारंभ
ड्रोन शो का आरंभ हुआ गगनचुंबी त्रिशूल की आकृति से, जिसके साथ ही पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद धीरे-धीरे रोशनी से उकेरे गए दृश्यों में बाबा बैद्यनाथ मंदिर की 3D संरचना को दर्शाया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पौराणिक कथाओं की झलक और श्रद्धा की पराकाष्ठा
ड्रोन शो में रावण और शिवलिंग से जुड़ी पौराणिक कथा को भी रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि कैसे रावण शिव को लंका ले जाना चाहता था और रास्ते में यही स्थान (वर्तमान देवघर) बाबा बैद्यनाथ धाम बना। इसके अलावा 12 ज्योतिर्लिंगों की झलकियाँ भी रोशनी के माध्यम से दिखाई गईं, जिससे दर्शक भाव-विभोर हो गए।

कांवड़ियों की आस्था को मिला नया रंग
ड्रोन शो में विशेष स्थान दिया गया कांवड़ यात्रा को — जहाँ गंगा जल लेकर बाबा के दरबार तक पहुँचने वाले लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा को रोशनी की कतारों और रंगों के माध्यम से दिखाया गया। यह नजारा देखकर हर किसी की आंखें श्रद्धा से भर आईं।

तकनीक और भक्ति का अद्वितीय मेल
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि परंपरा और तकनीक का साथ भी आध्यात्मिक अनुभवों को और अधिक प्रभावशाली बना सकता है। यह पहल न केवल झारखंड सरकार और जिला प्रशासन की दूरदर्शिता को दर्शाती है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक प्रेरक मॉडल भी प्रस्तुत करती है।

अंत में उभरा मंत्र — “ॐ नमः शिवाय”
शो का समापन अत्यंत भव्य था। जैसे ही आसमान में ‘ॐ नमः शिवाय’ की आकृति उभरी, पूरा मैदान शांति और भक्ति में डूब गया। श्रद्धालु हाथ जोड़कर आशीर्वाद मांगते रहे, और भावनाओं से भीगीं आंखों से देखते रहे आसमान में बने बाबा के रूप को।

इस बार का श्रावणी मेला न केवल धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि एक सांस्कृतिक, तकनीकी और भावनात्मक अनुभव भी बना, जिसे आने वाले वर्षों तक याद रखा जाएगा।
