टॉयलेट सीट लेकर बेटी का नामांकन कराने पहुंचा पिता, 67 साल से बेटियों के लिए बंद इंटर कॉलेज पर उठे सवाल

Advertisement

देशभर में जहां एक ओर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के जरिए बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो इन दावों की हकीकत पर सवाल खड़ा करता है। यहां एक सरकारी इंटर कॉलेज में पिछले 67 वर्षों से लड़कियों के प्रवेश पर अनौपचारिक रोक लगी हुई है।मामला तब सुर्खियों में आया जब एक पिता अपनी बेटी का नामांकन कराने के लिए कॉलेज पहुंचा—लेकिन खाली हाथ नहीं, बल्कि अपने कंधे पर टॉयलेट सीट लेकर। पिता का कहना था कि स्कूल प्रबंधन हर बार यह कहकर उसकी बेटी का दाखिला टाल देता है कि कॉलेज में लड़कियों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस बार वह खुद टॉयलेट सीट लेकर पहुंच गया ताकि कोई बहाना न बच सके।स्थानीय लोगों के अनुसार, यह कॉलेज वर्षों से केवल लड़कों के लिए ही संचालित किया जा रहा है, जबकि यह एक सरकारी संस्थान है और यहां सह-शिक्षा (को-एजुकेशन) का प्रावधान होना चाहिए। आरोप यह भी है कि जानबूझकर लड़कियों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा ताकि पास के निजी स्कूलों को फायदा मिल सके।इस घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बेटियों को पढ़ाने के लिए उन्हें दूर-दराज के स्कूलों में भेजना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ सरकारी योजनाओं की साख को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में लैंगिक असमानता को भी बढ़ावा देती हैं। अगर एक सरकारी स्कूल में ही बेटियों के लिए दरवाजे बंद हैं, तो फिर ‘समान शिक्षा’ का सपना कैसे पूरा होगा?वहीं, इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अब प्रशासन ने जांच के आदेश देने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Amarnath Pathak

अमरनाथ पाठक एक समर्पित समाचार लेखक (News Writer) हैं, जिन्हें ताज़ा खबरों और महत्वपूर्ण घटनाओं को सरल और सटीक तरीके से प्रस्तुत करने का अनुभव है। वे देश-विदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर नियमित रूप से लेख लिखते हैं। अमरनाथ का लक्ष्य पाठकों तक सही, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है। वे हमेशा ऐसी खबरें लिखने पर ध्यान देते हैं जो लोगों के लिए उपयोगी और जागरूकता बढ़ाने वाली हों। समाचार लेखन के क्षेत्र में उनकी रुचि और मेहनत उन्हें एक भरोसेमंद कंटेंट क्रिएटर बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp  Join group