
टाटीझरिया प्रखंड के धरमपुर गांव में शनिवार को मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। धरमपुर प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र के समीप कड़कती ठंड में झाड़ियों के बीच एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में पाई गई। सुबह के समय मासूम की सिसकियों की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जहां झाड़ियों में कपड़े में लिपटी नवजात बच्ची को देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।

घटना की सूचना फैलते ही गांव में सनसनी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां जुट गए। ठंड से कांप रही बच्ची को तत्काल सुरक्षित स्थान पर लाया गया और उसे गर्म कपड़े में लपेटकर प्राथमिक देखभाल की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर बच्ची की आवाज नहीं सुनाई देती, तो उसकी जान खतरे में पड़ सकती थी।
बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर नवजात को छोड़ा गया, वह प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र के बिल्कुल पास है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि बच्ची को जन्म के तुरंत बाद ही वहां फेंका गया होगा। सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस को भी अवगत कराया गया, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
यह घटना समाज में आज भी बेटियों के प्रति सोच पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिसे घर की लाड़ली बनना था, उसे अपनों ने ही ठंड और मौत के हवाले छोड़ दिया। धरमपुर की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए आईना है, जो पूछती है—क्या आज भी बेटी होना गुनाह है?
