पिछली बार रो पड़ा था, अब फिर वही हाल’— भारत छोड़ते वक्त अमेरिकी व्लॉगर गभ्रुजी भावुक, कहा: सिर्फ 8 घंटे बाकी

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नई दिल्ली — भारत से विदा लेने की घड़ी एक बार फिर अमेरिकी व्लॉगर गभ्रुजी के लिए बेहद भावुक बन गई। भारत छोड़ने से पहले उन्होंने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनका दर्द, लगाव और अपनापन साफ झलकता है। वीडियो में गभ्रुजी कहते सुनाई देते हैं कि “पिछली बार भी भारत छोड़ते समय रो पड़ा था, और इस बार भी वही हाल है। अब सिर्फ 8 घंटे बाकी हैं।” उनकी आवाज़ में भारीपन और आंखों में नमी ने लाखों दिलों को छू लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे भारत के प्रति सच्चे प्रेम की मिसाल बता रहे हैं।


गभ्रुजी ने अपने वीडियो में भारत के लोगों की गर्मजोशी, संस्कृति की विविधता, खाने की खुशबू, और रोजमर्रा की सुविधाओं का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत में उन्हें कभी पराया महसूस नहीं हुआ। “यहां के लोग मुस्कुराकर अपनाते हैं, मदद के लिए आगे बढ़ते हैं और हर शहर की अपनी एक आत्मा है,”—उनके ये शब्द दर्शकों के दिलों तक सीधे पहुंच गए। गभ्रुजी ने यह भी कहा कि भारत में रहकर उन्हें सादगी और अपनापन सीखने को मिला, जो दुनिया के कई हिस्सों में दुर्लभ है।


वीडियो में गभ्रुजी यह स्वीकार करते हैं कि भारत सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि उनके लिए एक एहसास बन चुका है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, किफायती सेवाओं, स्ट्रीट फूड से लेकर त्योहारों तक—हर उस अनुभव को याद किया जिसने उनके भारत प्रवास को खास बना दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्हें यह सिखाया कि खुश रहने के लिए बहुत कुछ नहीं, बल्कि सही लोग और सही माहौल चाहिए। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। यूजर्स गभ्रुजी को “दिल से भारतीय”, “इंडिया का सच्चा दोस्त” और “कल्चर एम्बेसडर” तक कह रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि जब कोई विदेशी भारत को इतनी शिद्दत से याद करता है, तो यह देश की सॉफ्ट पावर और मानवीय जुड़ाव की सबसे खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। कुछ यूजर्स ने उन्हें जल्द वापस आने का न्योता भी दिया। भारत छोड़ते समय गभ्रुजी का यह भावुक क्षण केवल एक विदाई नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि भारत की आत्मा उसके लोगों में बसती है—जो दूर देश से आए किसी मेहमान को भी अपना बना लेती है। गभ्रुजी ने वीडियो के अंत में कहा कि वे जल्द ही फिर लौटेंगे, क्योंकि “कुछ जगहें दिल में घर बना लेती हैं, और भारत मेरे लिए वैसा ही है।”

Amarnath Pathak

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