इस्लामाबाद / रावलपिंडी।
पाकिस्तान की सड़कों पर बिक रही एक अजीबोगरीब दवा इन दिनों चर्चा में है। ट्रैवल ब्लॉगर एलेक्स वांडर्स ने अपनी हालिया पाकिस्तान यात्रा के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वहां सड़कों पर खुलेआम ‘सांडा का तेल’ यानी छिपकली के तेल को वियाग्रा बताकर बेचा जा रहा है, जिसे मर्दानगी बढ़ाने की दवा कहा जाता है। एलेक्स ने यह नज़ारा रावलपिंडी के मशहूर राजा बाजार में देखा, जहां सड़क किनारे बैठे विक्रेता छोटी-छोटी भट्टियों पर छिपकलियों को भूनते नजर आए। पूछताछ करने पर बताया गया कि यह तेल पुरुषों की ताकत और यौन क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे बनता है ‘सांडा का तेल’
विक्रेताओं के मुताबिक, यह तेल भारतीय स्पाइनी-टेल्ड छिपकली (Saara hardwickii) की चर्बी से बनाया जाता है।
छिपकली को पकड़कर मार दिया जाता है, फिर उसकी पूंछ और शरीर की चर्बी को भूनकर तेल निकाला जाता है।
इसमें केसर, दालचीनी, अदरक और जंगली जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं। तेल का रंग कोला जैसा होता है और तेज जलन भरी गंध आती है।
“नेचुरल वियाग्रा” बताकर बिक्री
विक्रेता दावा करते हैं कि यह तेल मालिश करने से ‘स्टील जैसी ताकत’ देता है। छोटी शीशी की कीमत 300 रुपये से शुरू होकर 2000 रुपये तक जाती है।.कई दुकानदारों का कहना है कि रोज़ 50 से ज्यादा बोतलें बिक जाती हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी
डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तेल का कोई वैज्ञानिक या मेडिकल प्रमाण नहीं है।
यह पूरी तरह अंधविश्वास और प्लेसीबो इफेक्ट पर आधारित है।
इसके इस्तेमाल से एलर्जी, संक्रमण और त्वचा रोग का खतरा हो सकता है।
कानूनन भी अवैध
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह छिपकली CITES Appendix-II में संरक्षित प्रजाति है।
इसका शिकार और व्यापार पाकिस्तान में कानूनी रूप से प्रतिबंधित है, इसके बावजूद खुलेआम बिक्री जारी है।
2023 में वियाग्रा पर प्रतिबंध के बाद इसकी मांग और तेजी से बढ़ी है।
