खनिज परिवहन में पारदर्शिता के लिए बिहार सरकार का बड़ा फैसला

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पटना। खनिज परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने निर्णय लिया है कि अब दूसरे राज्यों से बालू, पत्थर, स्टोन चिप्स, मोरम और स्टोन डस्ट जैसे खनिज लेकर बिहार में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए ट्रांजिट पास अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अवैध खनन और खनिजों की अवैध ढुलाई पर रोक लगाना तथा राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।सरकार द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब बिना वैध ट्रांजिट पास के कोई भी वाहन राज्य की सीमा से खनिज लेकर अंदर प्रवेश नहीं कर सकेगा। यदि किसी वाहन के पास वैध ट्रांजिट पास नहीं पाया जाता है तो उसे सीमा पर ही रोक दिया जाएगा और आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही संबंधित वाहन पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।खनन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से दूसरे राज्यों से खनिजों की ढुलाई के दौरान कई मामलों में अनियमितता और अवैध परिवहन की शिकायतें मिल रही थीं। कई वाहन बिना सही दस्तावेजों के ही खनिज लेकर राज्य में प्रवेश कर जाते थे, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता था। नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे मामलों पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।सरकार ने सीमा क्षेत्रों में निगरानी को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लेने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य की सीमाओं पर डिजिटल सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी की जा सकेगी। इन कैमरों के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि वाहन के पास वैध ट्रांजिट पास है या नहीं।अधिकारियों ने बताया कि ट्रांजिट पास प्रणाली लागू होने से खनिज परिवहन की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो जाएगी। साथ ही अवैध खनन और अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। इससे सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होने की संभावना है।खनन विभाग ने सभी ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और खनिज परिवहन से पहले आवश्यक ट्रांजिट पास जरूर बनवाएं। बिना वैध दस्तावेजों के खनिज परिवहन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। साथ ही राज्य को मिलने वाले राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी, जिसका लाभ विकास कार्यों में लगाया जा सकेगा।

Amarnath Pathak

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