अपनी ही सरकार पर नहीं भरोसा! मुआवजा और विस्थापन मुद्दे पर अंबा प्रसाद और योगेंद्र साव का सरकार पर हमला

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झारखंड में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी के ही दो वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारीबाग जिले के केरेडारी क्षेत्र में अतिक्रमण, विस्थापन और मुआवजा को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव में तब्दील होता नजर आ रहा है। पिछले एक सप्ताह से केरेडारी में मुआवजा और विस्थापन को लेकर पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और जिला प्रशासन आमने-सामने हैं। इसी बीच हजारीबाग पहुंचे पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्हें अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यही कारण है कि अब उन्हें न्याय के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ रहा है। योगेंद्र साव ने कहा कि यह सरकार उनकी नहीं है, सरकार जनता की होनी चाहिए। अब जनता को अपने हक और न्याय के लिए सड़कों पर उतरना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुआवजा की मांग को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण धरने के दौरान प्रशासन ने उन्हें जबरन उठा लिया, जिससे मामला और अधिक तूल पकड़ गया। पूर्व मंत्री ने यह भी आशंका जताई कि उन्हें जान का खतरा है और उनकी हत्या भी हो सकती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वहीं कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव सह पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने भी अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सरकार से नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को लेकर है। उन्होंने कहा कि सरकार की आंख खोलने के लिए यह संघर्ष किया जा रहा है।


अंबा प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विस्थापितों को न्याय मिलना चाहिए और भूमि अधिग्रहण से संबंधित 2013 का कानून पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापितों को न तो समुचित मुआवजा मिल रहा है और न ही पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई है। उन्होंने यहां तक कहा कि विस्थापितों के अधिकारों के लिए अगर उन्हें मरना भी पड़े, तो वे इसके लिए तैयार हैं। कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के इन बयानों से राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है और सरकार पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।

Amarnath Pathak

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