
तमिलनाडु में कार्तिकेय दीपम से जुड़े विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में उठाया गया हर कदम निष्पक्ष होना चाहिए। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन को किसी भी तरह की राजनीतिक मंशा या दबाव में आकर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े मामलों में प्रशासन की भूमिका बेहद संवेदनशील होती है। ऐसे मामलों में यदि किसी प्रकार का पक्षपात या राजनीतिक हस्तक्षेप होता है, तो इससे समाज में तनाव और अविश्वास का माहौल पैदा हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान है और शांति भंग करने वाले किसी भी तत्व के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए।

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कार्तिकेय दीपम से जुड़े विवाद के दौरान किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत न हों और न ही किसी को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जाए। अदालत ने यह भी जोड़ा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का दायित्व है कि वह सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे, न कि राजनीतिक लाभ के लिए निर्णय ले। इस टिप्पणी को राज्य में चल रहे कार्तिकेय दीपम विवाद के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट की यह सख्त टिप्पणी प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि वह निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के साथ काम करे, ताकि किसी भी तरह की सामाजिक अशांति को रोका जा सके।
