जब मोबाइल पर बज रही थी मौत की घंटी

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जैसे ही निकले, धोना पड़ा जिंदगी से हाथ, किस्मत ने छोड़ दिया साथ

हजारीबाग। इस सस्पेंस, थ्रिलर और रोंगटे खड़े कर देनेवाली रात सोमवार करीब नौ बजे की थी। मोबाइल पर बार-बार मौत की घंटी बज रही थी। वह समझ नहीं पाया और सरकारी आवास से निकल आया और यहीं उसने गलती कर दी और जिंदगी से उस शख्स को हाथ धोना पड़ा। यहां किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और परफेक्ट मर्डर प्लान का शिकार बन गया। काश, कि उसने मौत की दस्तक सुनी और समझी होती, तो हंसता-खेलता दो मासूमों के सिर से पिता का साया यूं नहीं छिनता। भले ही गुलाबी सर्दी भरी रात थी, लेकिन ट्रैफिक पूरी तरह सुनसान भी नहीं थी, जब खून से सना शरीर झील मार्ग के पलभर के सन्नाटे को धांय-धांय छह गोलियों की आवाज सहसा चीर गया। फिर दो महिलाएं और एक पुरुष रक्त से लथपथ काया को संभालने दौड़ पड़ा। फिर जब वारदात का राज खुला, तो शहर से लेकर गांव तक सभी अवाक रह गए। मौत के साये में समाया वह शख्स और कोई नहीं नामचीन चेहरा हजारीबाग स्थित कटकमदाग के पूर्व मुखिया उदय साव का था, जो वर्तमान प्रमुख विनीता देवी का पति था। आखिर इस मर्डर के पीछे का सस्पेंस क्या है, पुलिस कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पूर्व मुखिया ने अपने आस्तीन में कई दुश्मन पाल रखे थे। एनटीपीसी की सब- आर्डिनेटर कंपनी के एजीएम गोपाल सिंह की हत्या और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष लखन साव पर एटेंप्ट टू मर्डर केस में उसका नाम आया था। वह हवालात से भी जमानत पर बाहर निकला था। फिर झील रोड स्थित सरस्वती कुंज अपार्टमेंट में जिस ब्यूटी पार्लर संचालिका से अक्सर मिलता रहा, उससे भी पूछताछ जारी है। साथ में मौत की गोलियों से छलनी होने पर जो संभालने स्त्री -पुरुष आए, उनकी भी पृष्ठभूमि खंगाली जा रही है। मौत के बरकरार रहस्य से अभी पर्दा उठना शेष है। अनुसंधान के विभागीय मुखिया पुलिस कप्तान ने उम्मीद जाहिर की है कि सस्पेंस पर छाया धुंध जल्द छंटेगा और साजिशकर्ता शीघ्र बेनकाब होंगे। हाल ही हुए दो अन्य वारदात गाड़ी में प्रकाश कुमार ठाकुर और शहर के खीरगांव इलाके में रामनवमी महासमिति के अध्यक्ष रह चुके मंजीत यादव का मर्डर भी कुछ ऐसे ही गैंगस्टर स्टाइल में की गई। बर्फ सिर्फ इतना था कि इन दोनों को घर में घुसकर गोलियां मारी गईं। वैसे प्रकाश ठाकुर की हत्या के एक आरोपी को पुलिस ने दबोच लिया है और अन्य मामलों का खुलासा होना बाकी है। आमजन पर्दे के पीछे सच की तस्वीर जानने को बेताब हैं।

Amarnath Pathak

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